नई दिल्ली | दिल्ली दर्पण ब्यूरो
राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं, इसका खौफनाक मंजर आज राजपुरा गाँव और रूपनगर को जोड़ने वाले पुल पर देखने को मिला। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (दिल्ली सरकार) के अंतर्गत आने वाला यह महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस दर्दनाक हादसे में दो महिलाओं की मौत की खबर है, जिसने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है।
सवालों के घेरे में ‘रेखा सरकार’ आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार में दिल्ली की जनता कब तक अपनी जान की कीमत चुकाती रहेगी? कभी सड़कों के गहरे गड्ढे लोगों को निगल रहे हैं, तो कभी जर्जर हो चुके सरकारी निर्माण मौत का फंदा बन रहे हैं। राजपुरा गाँव और रूपनगर के बीच का यह पुल लंबे समय से बदहाली का शिकार था, लेकिन सरकार ने समय रहते इसकी सुध लेना उचित नहीं समझा।
एमसीडी और विभाग की मिलीभगत या नाकामी? एक ओर दिल्ली सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे का इस तरह गिरना भ्रष्टाचार की ओर साफ इशारा करता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुल की मरम्मत के लिए कई बार शिकायतें की गई थीं, लेकिन फाइलों के बोझ तले दबी शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता ने आज दो घरों के चिराग बुझा दिए।
जनता का आक्रोश: और कितनी बलि चाहिए? हादसे के बाद इलाके में भारी तनाव है। लोगों का सीधा सवाल मुख्यमंत्री से है— “रेखा जी, क्या दिल्ली की जनता का जीवन इतना सस्ता है? आखिर और कितनी लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी?” क्या हर बार की तरह इस बार भी केवल जांच कमेटी बिठाकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या फिर उन अधिकारियों और जिम्मेदारों पर गाज गिरेगी जिनकी अनदेखी ने यह खूनी खेल खेला है?

