दिल्ली की सड़कें, जो पहले से ही गाड़ियों और भीड़ से भरी हैं, अब एक नई चुनौती का सामना कर रही हैं – ई-रिक्शा। ये छोटे, सस्ते और पर्यावरण-अनुकूल वाहन लाखों लोगों के लिए सुविधा हैं, लेकिन क्या ये जाम, दुर्घटनाओं और जान-माल के लिए खतरा बन चुके हैं?
दिल्ली की सड़कों पर ई-रिक्शा की संख्या तेजी से बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 1.5 लाख पंजीकृत ई-रिक्शा हैं, लेकिन अवैध ई-रिक्शा की संख्या इससे कहीं ज्यादा, लगभग 2 लाख से अधिक। ये ई-रिक्शा मेट्रो स्टेशनों, बस स्टैंड और चौराहों पर बेतरतीब खड़े होकर जाम का कारण बन रहे हैं। दिल्ली यातायात पुलिस की एक रिपोर्ट में ई-रिक्शा को सड़क पर चलने वालों और यात्रियों के लिए खतरनाक बताया गया है।
पिछले कुछ सालों में ई-रिक्शा से होने वाली दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। 2023 में ई-रिक्शा चालकों ने यातायात नियमों का 53% ज्यादा उल्लंघन किया, जिसमें अवैध पार्किंग के 70,463 मामले शामिल हैं। कई बार नाबालिग चालक, बिना लाइसेंस और बिना प्रशिक्षण के ई-रिक्शा चलाते पाए गए, जिससे सड़क हादसों का खतरा बढ़ गया। रेवाड़ी में एक साल में 47 दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें 3 लोगों की मौत और 67 लोग घायल हुए।
दिल्ली सरकार और यातायात पुलिस ने इस समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2024 में दिल्ली सरकार ने अवैध ई-रिक्शा को जब्त कर 7 दिनों में स्क्रैप करने का नियम लागू किया। पिछले साल उपराज्यपाल वीके सक्सेना के निर्देश पर 15,000 अवैध ई-रिक्शा जब्त किए गए। परिवहन विभाग ने बिना लाइसेंस, इंश्योरेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट वाले ई-रिक्शा के खिलाफ सख्ती बढ़ाई है। 236 सड़कों पर ई-रिक्शा के चलने पर रोक है, लेकिन कई चालक इन नियमों की अनदेखी करते हैं।
लेकिन क्या सारी गलती ई-रिक्शा चालकों की है?

ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि उनके लिए उचित स्टैंड, चार्जिंग पॉइंट और सस्ती रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की कमी है। कई चालक मानते हैं कि अगर सरकार उनकी मदद करे, तो वे नियमों का पालन करने को तैयार हैं। साथ ही, ई-रिक्शा सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल सवारी का साधन है, जो दिल्ली की भीड़ में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी प्रदान करता है।
तो क्या ई-रिक्शा वाकई दिल्ली के लिए खतरा हैं? सच यह है कि समस्या ई-रिक्शा में नहीं, बल्कि इसके अनियंत्रित संचालन और व्यवस्था की कमी में है। अगर सरकार और चालक मिलकर काम करें, तो ई-रिक्शा न केवल जाम और दुर्घटनाओं को कम कर सकता है, बल्कि दिल्ली की सड़कों को और सुगम बना सकता है।
ई-रिक्शा दिल्ली के लिए वरदान भी है और चुनौती भी। अब सवाल आपसे है – क्या आपको लगता है कि ई-रिक्शा पर पूरी तरह रोक लगानी चाहिए, या इसे व्यवस्थित करके दिल्ली की सड़कों का हिस्सा बनाना चाहिए?

