Monday, January 26, 2026
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मासूम की दर्दनाक मौत: रोहिणी दिल्ली में पानी की बाल्टी बनी मौत का कारण

दिल्ली का रोहिणी इलाका, जहां हर दिन की जिंदगी सामान्य दिखाई देती है, वहीं बीते दिन एक मासूम की मौत ने पूरे मोहल्ले को हिला दिया। ये घटना ऐसी थी जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी—एक साधारण पानी की बाल्टी मौत का कारण बन जाएगी, ये किसने सोचा होगा।

मासूम का खेल-खेल में फिसलना

मामला रोहिणी के एक घर का है। दो साल का बच्चा घर के आंगन में खेल रहा था। माता-पिता उसे देखकर निश्चिंत थे कि वह सुरक्षित है। लेकिन बच्चे की मासूम हरकतें पलभर में हादसे में बदल गईं। खेलते-खेलते वह बाथरूम की ओर चला गया, जहां पानी से भरी एक बड़ी बाल्टी रखी हुई थी। जिज्ञासा में बच्चा शायद बाल्टी में झांकना या हाथ डालना चाहता था। उसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह बाल्टी में मुंह के बल गिर पड़ा।

चंद मिनटों में सब खत्म

बच्चा इतना छोटा था कि खुद से बाहर नहीं निकल पाया। सिर पानी में डूबे रहने की वजह से वह सांस नहीं ले सका। घर वालों को कुछ देर बाद जब उसकी आहट नहीं सुनाई दी तो उन्होंने खोज शुरू की। बाथरूम का नजारा देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने बताया कि बहुत देर हो चुकी थी।

पड़ोस में मातम

इस घटना के बाद रोहिणी का पूरा मोहल्ला शोक में डूब गया। जहां कल तक बच्चे की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा है। पड़ोसियों का कहना है कि वह बच्चा बेहद चंचल और प्यारा था। लोग यकीन ही नहीं कर पा रहे हैं कि एक बाल्टी जैसे मामूली चीज से किसी की जिंदगी इतनी बेरहमी से छिन सकती है।

दर्द और सवाल

मासूम की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। मां को इस बात का पछतावा है कि काश वह उस वक्त बच्चे को बाथरूम तक जाने से रोक लेती। लेकिन हादसे ऐसे ही होते हैं—बिना बताए, अचानक, और जीवनभर का घाव देकर।

यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या हम बच्चों की सुरक्षा को लेकर उतने सतर्क हैं जितनी जरूरत है? घरों में रखी पानी की बाल्टियां, खुले टैंक, छत पर रखे ड्रम, या यहां तक कि छोटे गढ्ढे भी छोटे बच्चों के लिए खतरा बन सकते हैं।

सुरक्षा पर ध्यान जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों को कभी भी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, खासकर पानी से भरे स्थानों के आसपास। यह जरूरी है कि घर में रखी बाल्टियों को ढककर रखा जाए या फिर खाली किया जाए। माता-पिता और परिवार के अन्य लोगों को बच्चों पर हमेशा नजर बनाए रखनी चाहिए।

समाज के लिए सबक

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। हमें समझना होगा कि बच्चों के मामले में छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। बच्चों के आसपास का माहौल हमेशा सुरक्षित होना चाहिए।

निष्कर्ष

रोहिणी की इस घटना ने सबको गहरे दुख में डाल दिया है। एक मासूम की जिंदगी, जो अभी शुरू ही हुई थी, पानी की एक बाल्टी में डूबकर खत्म हो गई। यह हमें याद दिलाती है कि बच्चों के लिए सुरक्षा के छोटे-छोटे कदम भी कितने बड़े मायने रखते हैं। शायद इस परिवार का दर्द दूसरों के लिए सबक बने और भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की मौत का शिकार न बने।

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