Thursday, March 12, 2026
spot_img
Homeदिल्लीलैंड फॉर जॉब केस: लालू-राबड़ी और तेजस्वी पर फैसला एक बार फिर...

लैंड फॉर जॉब केस: लालू-राबड़ी और तेजस्वी पर फैसला एक बार फिर टला, कोर्ट ने CBI से मांगी नई जानकारी

लैंड फॉर जॉब मामले में आज एक बार फिर वह फैसला नहीं आ सका, जिसका इंतज़ार लंबे समय से किया जा रहा था। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ने आदेश सुनाने के बजाय CBI से कुछ और महत्वपूर्ण जानकारी पेश करने को कहा। इसके साथ ही, यह मामला 8 दिसंबर तक के लिए आगे बढ़ गया। अदालत का यह निर्णय न केवल कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता को दिखाता है, बल्कि यह भी बताता है कि इस केस की हर कड़ी को बेहद सावधानी से जांचा जा रहा है।

मामला आखिर है क्या?

यह पूरा मामला उन दिनों का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। CBI का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच कुछ लोगों को रेलवे में ग्रुप-D की नौकरियाँ इस शर्त पर मिलीं कि उनके परिवार अपनी जमीन बेहद कम दाम पर यादव परिवार या उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम कर दें। CBI का दावा है कि कई जमीनें अपनी असली कीमत से कई गुना कम रेट पर खरीदी गईं। वहीं, यादव परिवार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताता रहा है।

आज की सुनवाई में क्या हुआ?

आज की सुनवाई में माहौल थोड़ा तनावपूर्ण भी था और उत्सुकता भरा भी। सभी की नज़रें इस बात पर थीं कि आखिरकार अदालत आरोप तय करने को लेकर क्या निर्णय देगी। लेकिन जज ने साफ कहा कि उनके सामने अभी कुछ जानकारी अधूरी है। लिहाज़ा, CBI को निर्देश दिया गया कि वह आरोपियों की संपत्ति, जमीन के कागज़ात और नियुक्तियों से जुड़े कुछ प्रशासनिक दस्तावेज़ दोबारा से उपलब्ध कराए।

यानी साफ है कि अदालत बिना पूरी तस्वीर देखे कोई भी जल्दबाज़ी नहीं करना चाहती।

परिवार के लिए राहत… या इंतज़ार की बेचैनी?

इस फैसले के टलने को यादव परिवार के लिए कुछ लोग अस्थायी राहत मानते हैं, क्योंकि आज आरोप तय होने की संभावना भी थी। लेकिन दूसरी तरफ यह इंतज़ार भी बढ़ गया है कि आगे कानूनी रास्ता किस दिशा में मुड़ता है। तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी पहले भी कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ मामला पूरी तरह “राजनीतिक प्रेरित” है। वहीं CBI का दावा है कि उसके पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।

राजनीतिक हलकों में हलचल

इस केस ने बिहार की राजनीति में पहले से ही बड़ी हलचल मचा रखी है। RJD समर्थक इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हैं, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार का “क्लासिक केस” बताता है। आने वाले चुनावों को देखते हुए भी दोनों पक्ष इस केस को लेकर बेहद मुखर हैं। कोर्ट की तारीखों और फैसलों पर राजनीतिक गलियारों में खास नजर रहती है।

आगे क्या?

अब अगली सुनवाई 8 दिसंबर को होगी। उस दिन यह तय हो सकता है कि क्या अदालत आरोप तय करने का आदेश देगी या CBI द्वारा दी गई नई जानकारी पर कुछ और सवाल उठेंगे।

एक बात साफ है—यह मामला सिर्फ कानूनी कार्यवाही नहीं, बल्कि राजनीतिक भविष्य, परिवार की प्रतिष्ठा और जनविश्वास—इन तीनों से जुड़ चुका है। इसलिए हर तारीख, हर आदेश और हर बयान लोगों की नज़र में है।

यह भी पढ़ें: https://delhidarpantv.com/mcd-deputy-election-tears-behind-the-ward-in-these-5-reasons-for-bjp-not-to-rank-you-will-have-to-burn-everyone/

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments