नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस की 79वीं वर्षगांठ पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री श्री अशोक सूद के नेतृत्व में जनकपुरी विधानसभा क्षेत्र में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। ब्लॉक सी-1 से शुरू होकर डाबरी चौक तक चली इस यात्रा में जनकपुरी और आसपास की कॉलोनियों के निवासी, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधि, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी और कई स्कूलों के बच्चे हाथों में तिरंगा लिए शामिल हुए। पश्चिम दिल्ली की सांसद श्रीमती कमलजीत सेहरावत भी इस मौके पर मौजूद रहीं। यात्रा में करीब 8,000 लोगों ने भाग लेकर देशभक्ति और एकता का संदेश दिया।


अपने संबोधन में श्री सूद ने कहा कि “जनकपुरी की सभी संस्थाएं और नन्हें-मुन्ने आज एकत्र होकर विकसित दिल्ली, विकसित जनकपुरी और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे रहे हैं। यह तिरंगा यात्रा सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि स्वच्छता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव का संदेश है।”

श्री सूद ने बच्चों के साथ अपने बचपन की स्वतंत्रता दिवस की यादें साझा करते हुए कहा कि 15 अगस्त केवल झंडा फहराने और पतंग उड़ाने का दिन नहीं, बल्कि देश के लिए कुछ सार्थक करने का अवसर है। उन्होंने लोगों से चीनी मांझा छोड़कर स्वदेशी मांझा और तिरंगे रंग की पतंगों का प्रयोग करने की अपील की।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नारे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा” को याद करते हुए उन्होंने कहा कि आज देश को खून की नहीं, बल्कि जोश, अच्छे संस्कार और समाज में योगदान की ज़रूरत है। कारगिल के शहीदों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 20-25 वर्ष की आयु में देश के लिए जान देने वाले वीर जवान हम सबके लिए प्रेरणा हैं।

उन्होंने कहा, “देशभक्ति के लिए हर किसी को सीमा पर जाने की ज़रूरत नहीं है। स्वच्छता बनाए रखना, गलत काम न करना, यातायात नियमों का पालन करना, अच्छे नागरिक बनना, पर्यावरण की रक्षा करना और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना भी राष्ट्र सेवा है।”
इस अवसर पर सांसद श्रीमती कमलजीत सेहरावत ने कहा कि तिरंगा सिर्फ सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की याद दिलाता है, जिन्होंने हमें इसे फहराने का अधिकार दिलाया। उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, नेताजी सुभाष बोस और महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का स्मरण किया।
उन्होंने महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से उतार दिए जाने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने इसे व्यक्तिगत अपमान नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का अपमान समझा और जीवनभर आज़ादी के संघर्ष में समर्पित रहे।
सांसद ने कहा कि “आज की पीढ़ी को भले ही देश के लिए जान देने का अवसर न मिला हो, लेकिन देश के लिए जीने का अवसर अवश्य मिला है।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए नागरिकों से राष्ट्र निर्माण, सेवा और विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

