दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के नियमों को लेकर अभिभावकों के बीच भारी असमंजस और चिंता का माहौल है। फोरम फॉर इंडियन पेरेंट्स (FIP) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2025 को अधिसूचित किए गए इन नियमों में कई गंभीर कमियां गिनाई हैं।
अभिभावकों की मुख्य आपत्तियाँ
- स्वतंत्र ऑडिट का अभाव: जिला या राज्य स्तर की समितियाँ केवल स्कूलों द्वारा नियुक्त सीए (CA) की रिपोर्ट की जांच करेंगी। किसी भी स्तर पर विभाग द्वारा स्वतंत्र ऑडिट का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
- अपील के लिए 15% की शर्त: नियमों के अनुसार, किसी भी अपील के लिए एक ही कक्षा या स्कूल के कम से कम 15% अभिभावकों का समूह होना अनिवार्य है। FIP का मानना है कि यह शर्त अपील की प्रक्रिया को लगभग अप्रभावी बना देगी।
- अभिभावकों पर बढ़ा बोझ: खातों की जांच करने और भ्रष्टाचार की शिकायत करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की जगह आम अभिभावकों पर डाल दी गई है।
- EWS दाखिले और पारदर्शिता: ड्रा ऑफ लॉट्स को केंद्रीकृत तो किया गया है, लेकिन स्कूलों में निर्वाचित PTA बॉडी की अनुपस्थिति में इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।
सत्र 2026-27 को लेकर बना भ्रम
FIP के अध्यक्ष एडवोकेट खगेश बी. झा ने बताया कि नियमों में देरी की वजह से आगामी शैक्षणिक सत्र (2026-27) की फीस संरचना को लेकर भारी असमंजस है। साथ ही, तीन साल के ‘फीस ब्लॉक’ को लेकर भी स्पष्टता नहीं है कि इन वर्षों के दौरान फीस समान रहेगी या उसमें बदलाव होगा।
अभिभावकों ने मांग की है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए ताकि निजी स्कूलों में शिक्षा के व्यवसायीकरण और बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव को रोका जा सके।
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