Monday, January 26, 2026
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दिल्ली में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 11 की जगह अब 13 जिले कई के नाम होंगे अपडेट

राजधानी में प्रशासनिक पुनर्गठन का बड़ा कदम उठाया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने जिलों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 करने के प्रस्ताव को प्रारंभिक स्वीकृति दे दी है। आगे इसकी अंतिम मंजूरी उपराज्यपाल द्वारा दिए जाने के बाद इसे लागू किया जाएगा। इस बदलाव के साथ दिल्ली के विभिन्न इलाकों की सीमाओं और नामों में भी अहम परिवर्तन देखने को मिलेंगे।

नई व्यवस्था में क्या होगा बदलाव?

मौजूदा जिलों की सीमाएँ अब एमसीडी के जोनों के हिसाब से दोबारा तय की जाएंगी, ताकि लोगों को अलग-अलग विभागों के दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ सके। इसके साथ कई जिलों के नाम भी बदले जाने हैं, ताकि प्रशासनिक इकाइयाँ इलाके की वास्तविक पहचान से मेल खा सकें।

प्रमुख बदलाव इस प्रकार प्रस्तावित हैं:

  • सदर ज़ोन का नाम बदलकर पुरानी दिल्ली जिला रखा जाएगा।
  • यमुना पार के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जिलों को नए नाम — शाहदरा उत्तर और शाहदरा दक्षिण — दिए जाएंगे।
  • मौजूदा उत्तर जिला अब दो हिस्सों में बंटेगा — सिविल लाइंस और पुरानी दिल्ली
  • दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों का एक भाग नए नजफगढ़ जिले का हिस्सा बनाया जाएगा।

प्रस्तावित जिलों की अपडेटेड सूची

नए पुनर्गठन के बाद जिन 13 जिलों का स्वरूप सामने आएगा, उनमें शामिल हैं—
पुरानी दिल्ली, मध्य डिफेंस, नई दिल्ली, सिविल लाइंस, करोल बाग, केशव पुरम, नरेला, नजफगढ़, रोहिणी, शाहदरा दक्षिण, शाहदरा उत्तर, दक्षिण दिल्ली और पश्चिम दिल्ली।

सरकार की योजना क्या है?

नई संरचना के तहत हर जिले में एक-एक मिनी सचिवालय (Mini Secretariat) स्थापित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि नागरिकों को एक ही परिसर में सभी आवश्यक सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों—जैसे राजस्व विभाग, समाज कल्याण, जल बोर्ड आदि।

इसके साथ ही सब-डिविजन (SDM) कार्यालयों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी—वर्तमान 33 से बढ़ाकर 39 करने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय स्तर पर सरकार की पहुंच और मजबूत होगी।

बदलाव क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है?

अब तक एमसीडी जोन और जिलों की सीमाओं में अंतर रहने के कारण लोगों को यह समझने में मुश्किल होती थी कि कौन-सा काम कहाँ होगा। बड़े जिलों में दफ्तर दूर होने की वजह से लोगों को साधारण कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी।

नए सेटअप से न सिर्फ यात्रा समय और खर्च कम होगा, बल्कि प्रशासनिक सेवाएँ भी लोगों के और करीब आएंगी। छोटे जिलों के कारण भीड़ बंटेगी, जवाबदेही बढ़ेगी और फाइलों के निपटारे की गति तेज होगी।

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