दिल्ली नगर निगम के उपचुनाव में अशोक विहार वार्ड पर आखिरकार बीजेपी ने कमल खिला दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के गृह क्षेत्र से सटे इस वार्ड को उन्होंने अपनी साख का विषय बना लिया था। वहीं, भारद्वाज परिवार की इस क्षेत्र में मजबूत पकड़ के कारण यह चुनाव विधायक सुरेश भारद्वाज की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया था।
सीएम रेखा गुप्ता ने चुनाव प्रचार के दौरान न सिर्फ लगातार दौरे किए, बल्कि कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ भी कीं। परिणामस्वरूप बीजेपी ने पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया और इस बार 401 वोटों से विजय दर्ज की।
इसके उलट, आम आदमी पार्टी का आत्मविश्वास उस समय धराशायी हुआ जब सीमा विकास गोयल को लेकर किए गए उनके दावे नतीजों में बदलते नहीं दिखे।
ऐसे में आइए समझते हैं कि आखिर किन 5 प्रमुख कारणों ने बीजेपी को यह जीत दिलाई और किस तरह आप की हार तय हो गई।
- कांग्रेस का अप्रत्याशित बेहतर प्रदर्शन
इस वार्ड में कांग्रेस ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया। निगम चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी विशाखा रानी को 1588 वोट मिले, जबकि अनुमान था कि पार्टी 1000 से नीचे रहेगी।
खासकर अंतिम समय में झुग्गी बस्तियों के वोट कांग्रेस की तरफ मुड़ने से मुकाबले में नया समीकरण बना। कांग्रेस के बढ़े वोट सीधे तौर पर आप प्रत्याशी सीमा विकास गोयल की वोटबैंक में सेंध लगाने वाले साबित हुए।
- सुरेश भारद्वाज परिवार की रणनीति
पूर्व पार्षद और वर्तमान विधायक पूनम भारद्वाज पहले यहां से सिर्फ 156 वोटों से जीती थीं। इसलिए यह सीट उनके परिवार के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन चुकी थी।
विधायक सुरेश भारद्वाज की संगठनात्मक पकड़ और रणनीति ने कांग्रेस को झुग्गी इलाकों में बढ़त दिलाई। साथ ही उन्होंने यह संदेश प्रभावी तरीके से पहुंचाया कि सांसद, विधायक और पार्षद एक ही पार्टी के होने से विकास तेज़ी से होगा, जिसने मतदाताओं को प्रभावित किया।

- सीएम रेखा गुप्ता के ताबड़तोड़ दौरे और घोषणाएँ
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता के अपने वार्ड के साथ-साथ अशोक विहार में भी उपचुनाव था।
उन्होंने राजधानी के 12 उपचुनावों में से सर्वाधिक ध्यान अशोक विहार वार्ड पर दिया।
करीब दर्जनभर दौरे
झुग्गीवासियों के लिए राहत योजनाएँ
उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर वितरण
पक्के मकानों की घोषणा
करोड़ों के बजट का ऐलान
इन घोषणाओं से झुग्गियों में बुलडोज़र कार्रवाई से पैदा नाराज़गी को कम करने का प्रयास किया गया, जिसका लाभ बीजेपी को मिला।
- वीना असीजा की छवि और संघ-संगठन की मजबूत पकड़
बीजेपी ने इस उपचुनाव में पूरी ताकत झोंक दी।
सांसद, केंद्रीय मंत्री, संघ और संगठन के पदाधिकारी लगातार वार्ड में सक्रिय रहे। तेज़ प्रचार और लगातार सभाओं ने माहौल बनाया कि बीजेपी इस सीट को आसानी से जीत रही है।
इसके साथ ही बीजेपी प्रत्याशी वीना असीजा की धार्मिक और सौम्य छवि भी मतदाताओं पर सकारात्मक असर छोड़ गई।

- A ब्लॉक के जुड़ने से बदला समीकरण
इस उपचुनाव में अशोक विहार फेज-1 का A ब्लॉक पहली बार जुड़ा, जिससे करीब 500–600 नए वोट शामिल हुए।
यह क्षेत्र परंपरागत रूप से बीजेपी समर्थक रहा है।
गौरतलब है कि गणना के अंतिम दौर में सीमा विकास गोयल 532 वोटों से आगे थीं, लेकिन गांव और A ब्लॉक के नतीजों ने पूरा समीकरण पलट दिया।
यदि A ब्लॉक नहीं जुड़ता तो चुनाव का परिणाम भिन्न हो सकता था।
अंत में पूनम भारद्वाज का प्रभावशाली भावनात्मक संदेश
इन सभी कारणों के साथ विधायक पूनम भारद्वाज का यह बयान भी प्रभावशाली साबित हुआ—
“यदि आपको लगता है कि मैंने दिल से काम किया है और आगे भी करूंगी, तो ही बीजेपी को वोट दें—वरना बिल्कुल नहीं।”
यह संदेश गांव के मतदाताओं पर गहरा असर छोड़ गया और बीजेपी को निर्णायक बढ़त मिली।
निष्कर्ष
अशोक विहार उपचुनाव में बीजेपी की जीत एक कारक नहीं, बल्कि कई स्तरों पर बनी रणनीतियों, स्थानीय समीकरणों, संगठन की ताकत और विपक्षी वोटों के बिखराव का परिणाम है। आप को इस वार्ड में हार इसलिए नहीं मिली कि उसका आधार कमजोर था, बल्कि इसलिए क्योंकि बीजेपी ने हर मोर्चे पर उसे मात दी।
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