Thursday, March 12, 2026
spot_img
Homeब्रेकिंग न्यूज़MCD की 'वसूली' का अड्डा बना अशोक विहार: ₹800 रोज की रिश्वत...

MCD की ‘वसूली’ का अड्डा बना अशोक विहार: ₹800 रोज की रिश्वत और अवैध खोखों का राज!!

 दिल्ली दर्पण ब्यूरो:

नई दिल्ली: उत्तर दिल्ली की सबसे प्रतिष्ठित और बड़ी मार्केटों में शुमार ‘अशोक विहार सेंट्रल मार्केट’ आज अपनी पहचान खो चुकी है। जो फुटपाथ पैदल चलने वालों के लिए थे, उन पर अब अवैध खोखों और रेहड़ी-पटरी माफिया का राज है। स्थानीय व्यापारियों का आरोप है कि यहाँ दुकानों के बाहर अवैध कब्जे करवाकर रोजाना ₹700 से ₹800 की वसूली की जा रही है, और यह सब कुछ एमसीडी अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है।

साहब के आने पर ‘कॉस्मेटिक’ सफाई, आम दिनों में बदहाली

मार्केट एसोसिएशन के नवनिर्वाचित प्रधान और व्यापारियों ने निगम की कार्यशैली की बखिया उधेड़ते हुए बताया कि सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। रविवार को जब सबसे ज्यादा भीड़ होती है, तब कोई सफाई कर्मचारी नजर नहीं आता। सोमवार को आधी मार्केट खुली होने के बावजूद कूड़े के अंबार लगे रहते हैं।

निगम की पोल खोलते कड़वे सच:

  • फर्जी कागजों का खेल: व्यापारियों का सीधा आरोप है कि मार्केट में कई खोखे फर्जी दस्तावेज बनाकर लगा लिए गए हैं। जिन्हें एक बार तोड़ा जाता है, वे अगले ही दिन फिर खड़े हो जाते हैं। बिना ‘ऊपर की सेटिंग’ के यह कैसे मुमकिन है?
  • पार्क बने कूड़ेदान: मार्केट के साथ लगते पार्कों की हालत बदतर है। अवैध कब्जा करने वाले अपना सारा कचरा पार्कों और नालों में फेंक देते हैं, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों खतरे में हैं।
  • लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर पर सवाल: क्या एलआई (LI) को सड़कों पर फैला यह अतिक्रमण नहीं दिखता? व्यापारियों का कहना है कि यह पूरा खेल मिलीभगत का है।

पार्षद की बेबसी या अधिकारियों की मनमानी?

मौके पर पहुँचीं क्षेत्रीय निगम पार्षद मीनाक्षी विजय जी ने खुद स्वीकार किया कि पूरे वार्ड में अतिक्रमण की समस्या गंभीर है। हालांकि, वह खुद को ‘नई’ बताकर अभी समाधान की तलाश में हैं, लेकिन सवाल यह है कि आखिर कब तक? जनता ने समाधान के लिए वोट दिया है, ‘कोशिश’ के वादों के लिए नहीं।

जब डीसी (DC) साहब के आने की खबर मिली, तब आनन-फानन में निगम का अमला हरकत में आया और कुछ रेहड़ियों को उठाना शुरू किया। व्यापारियों ने इसे ‘खानापूर्ति’ करार दिया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ साहब को दिखाने के लिए है, कल फिर वही ढांचा खड़ा मिलेगा।

तीखा सवाल: अगर अशोक विहार जैसी पॉश मार्केट का यह हाल है, जहाँ अक्सर सांसद, विधायक और पार्षद दौरा करते हैं, तो दिल्ली के बाकी हिस्सों की क्या दुर्गति होगी? क्या एमसीडी के अधिकारी सिर्फ वसूली और ‘औचक निरीक्षण’ के ड्रामे के लिए तैनात हैं?

यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/the-mcd-employee-and-the-weak-person-who-was-removed-from-the-office-of-the-cutter-and-who-then-got-stuck-at-night/

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments