Tuesday, March 3, 2026
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MCD केशवपुरम ज़ोन : कागज़ों में सील बिल्डिंग, ज़मीन पर खड़ा 4-मंज़िला भ्रष्टाचार का महल

– राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण ब्यूरो 

दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (MCD) का केशवपुरम ज़ोन इन दिनों भ्रष्टाचार और मनमानी का सबसे बड़ा अड्डा बनकर उभरा है, जहाँ कानून सिर्फ़ सरकारी फाइलों में ज़िंदा है। वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया की ए-91 नंबर की एक इमारत की चर्चा ज़ोरों पर है। यह बिल्डिंग MCD अधिकारियों, बिल्डर माफिया और सत्ता के गठजोड़ की शर्मनाक कहानी बयाँ कर रही है कि भ्रष्टाचार किस कदर बेख़ौफ़ होकर इस ज़ोन पर हावी है।

भीषण आग के बाद खड़ा हुआ ‘अवैध’ महल

वर्ष 2023 में, 1200 वर्ग गज की इस विशाल बिल्डिंग में भीषण आग लगी थी। दमकलकर्मियों को घंटों तक क्रेन और भारी मशीनों की मदद से आग पर काबू पाना पड़ा था, जिसके बाद यह इमारत पूरी तरह से तबाह हो गई थी। लेकिन, हैरानी की बात यह है कि आग के बाद बिल्डर ने बिना नक्शा पास कराए ही इस स्थान पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। जब MCD में इसकी शिकायत हुई, तो अधिकारियों ने जवाब दिया कि “नई बिल्डिंग नहीं बनी है, सिर्फ़ रिपेयरिंग हो रही है।” शिकायतकर्ता द्वारा गूगल मैप से ली गई तस्वीरों में साफ़ अवैध निर्माण दिखने के बावजूद, अधिकारियों ने आँख और कान पूरी तरह बंद रखे।

कोर्ट में ‘नूरा कुश्ती’, मज़दूर की मौत

यह मामला कोर्ट तक भी पहुँचा, जिसने ज़ोन के उपायुक्त (DC) को जांच के आदेश दिए। इसके बाद भी बिल्डर और ज़ोन उपयुक्त के बीच ‘कागज़ी नूरा कुश्ती’ जारी रही। बिल्डर को कई बार जांच में शामिल होने का मौका दिया गया, लेकिन वह पेश नहीं हुआ।इसी दौरान, इस अवैध निर्माण के पिछले हिस्से में एक मजदूर की मौत भी हो गई। लेकिन इस मौत से भी न बिल्डर रुका, न ही MCD की नींद टूटी।आखिर में, बिल्डर को सील का नोटिस दिया गया, जिसे उसने ठेंगे पर ही रखा। नतीजा यह है कि यह बिल्डिंग आज कागज़ों में सील है, लेकिन ज़मीन पर इस चार-मंज़िला इमारत को चार-चार हिस्सों में बांटकर फ्लोर बना दिए गए हैं और इसमें धड़ल्ले से फ़ैक्टरियाँ और कारोबार चल रहा है। यह सब महज दो साल के भीतर हुआ।

प्रतिनिधियों के दावे और विपक्ष का आरोप

इस मामले में स्थानीय निगम पार्षद और पूर्व ज़ोन चेयरमैन योगेश वर्मा ने संपर्क करने पर इस मामले की जांच और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही है। उन्होंने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा किया, लेकिन विपक्ष का दावा है कि वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में भ्रष्टाचार की ऐसी कई इमारतें हैं। पूर्व निगम पार्षद और MCD में नेता विपक्ष रहे विकास गोयल ने गंभीर आरोप लगाया कि वज़ीरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में आज भी MCD द्वारा कई सील फ़ैक्ट्रियों और बैंक्विट हाल में धड़ल्ले से काम चल रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो गोवा जैसे हादसे यहाँ भी हो सकते हैं, लेकिन MCD ऐसे हादसों से कोई सबक लेगी, ऐसा यहाँ नज़र नहीं आ रहा है।

जिम्मेदार अधिकारी लापता, बिल्डर का इंकार

इस मामले में ज़ोन के उपायुक्त (DC)  संदीप कुमार और अधिशासी अभियंता ललित से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वे दोनों ही न तो ऑफिस में उपलब्ध मिले और न ही फ़ोन पर। दूसरी ओर, जब बिल्डर से बात की गई, तो उन्होंने इस बिल्डिंग से कोई वास्ता होने से ही इंकार कर दिया, जबकि शिकायतों से लेकर MCD के नोटिस तक में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज है। जिम्मेदार अधिकारियों का इस तरह अनुपलब्ध होना और बिल्डर का झूठ, इस पूरे गठजोड़ पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

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