दिल्ली दर्पण ब्यूरो नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) के विद्यालयों को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शिक्षा विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, आगामी सत्र में निगम स्कूलों की सुरक्षा और सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ राजस्व जुटाने के लिए नवाचारपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। राजस्व बढ़ाने के लिए ‘बिजनेस मॉडल’ निगम ने अपने खाली पड़े संसाधनों का उपयोग आय बढ़ाने के लिए करने का निर्णय लिया है। इसके तहत:
विज्ञापन से कमाई: विद्यालयों की बाहरी दीवारों का उपयोग विज्ञापनों के लिए किया जाएगा।
ATM की स्थापना: जिन स्कूलों के पास अतिरिक्त भूमि है, वहां व्यावसायिक बैंकों के ATM बूथ स्थापित किए जाएंगे।
खेल सुविधाएं: स्कूल के मैदानों को PPP मॉडल पर विकसित किया जाएगा। यहाँ ‘खेलो इंडिया’ के तहत गतिविधियों से राजस्व प्राप्त होगा, जबकि निगम के छात्रों को निशुल्क कोचिंग मिलेगी। सुरक्षा और डिजिटल सुधार पर जोर छात्राओं की सुरक्षा और निगरानी के लिए सभी निगम विद्यालयों में CCTV कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव है। साथ ही, प्रधानाचार्यों को बेहतर संचार के लिए आधिकारिक मोबाइल सिम प्रदान की जाएगी। शिक्षकों की प्रशासनिक सुविधा के लिए विद्यालय परिसर में ही ‘बीट-ऑफिस’ या निरीक्षक कार्यालय स्थापित किए जाएंगे ताकि उन्हें कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। छात्रों की सेहत और भविष्य पर ध्यान
आगामी सत्र में बच्चों के लिए डिजिटल हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे। एनीमिया कंट्रोल प्रोग्राम और सैनिटरी पैड जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। ‘स्कूल चलो अभियान’ के माध्यम से उन बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ा जाएगा जो शिक्षा से वंचित हैं। उपलब्धियां: DBT से सीधे खातों में पहुंची राशि अध्यक्ष योगेश वर्मा ने बताया कि वर्ष 2025-26 में पहली बार 6.58 लाख छात्रों को यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के लिए ₹1,670 की राशि एक क्लिक में DBT के जरिए भेजी गई। इसके अलावा, करीब 1,400 शिक्षकों की लंबे समय से रुकी हुई पदोन्नति की गई और स्कूलों की मरम्मत के लिए लगभग ₹40 करोड़ का बजट खर्च किया गया। स्मार्ट बोर्ड और एडुलाइफ पोर्टल (EDULIFE Portal) जैसे डिजिटल माध्यमों से निगम स्कूल अब प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं।