दिल्ली शहर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में जब कभी कोई सनसनीखेज वारदात होती है, तो लोग ठिठक कर सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में घटी यह घटना भी ऐसी ही है, जिसने दोस्ती और रिश्तों पर भरोसा करने वालों को हिला दिया।
यह कोई सड़क पर हुई झड़प नहीं थी, न ही कोई लूटपाट की कोशिश। यह तो कहानी थी दो दोस्तों की, जो बचपन से साथ बड़े हुए थे। मोहल्ले में साथ घूमते-फिरते, हंसते-खेलते नज़र आते थे। लेकिन किसे पता था कि वही दोस्ती एक दिन खून में डूब जाएगी।
मौत से पहले की बहस
पुलिस के मुताबिक, आरोपी को काफी समय से शक था कि उसका दोस्त उसकी बहन के साथ रिश्ते में है। इस रिश्ते को वह किसी भी कीमत पर मंज़ूर नहीं करना चाहता था।
रात को आरोपी ने अपने दोस्त को बुलाया। दोनों के बीच बहस हुई। गुस्सा इतना बढ़ गया कि आरोपी ने जेब से चाकू निकाला और वार पर वार करने लगा। चंद ही मिनटों में उसका सबसे करीबी दोस्त ज़मीन पर लहूलुहान पड़ा था।
मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, चीखें इतनी डरावनी थीं कि पूरा मोहल्ला दहल गया। एक गवाह ने कहा:
“हम बाहर दौड़े तो देखा कि खून ही खून था। समझ ही नहीं आया कि ये दोनों दोस्त थे या दुश्मन।”
दोस्ती का धोखा या सोच की बंदिश?
इस वारदात ने कई सवाल खड़े कर दिए। क्या वाकई प्यार करना इतना बड़ा गुनाह है कि किसी की जान ले ली जाए? क्या परिवार की “इज़्ज़त” का मतलब इतना भारी है कि दोस्ती और इंसानियत को कुर्बान कर दिया जाए?
मृतक की मां रोते हुए बस यही कह पाईं:
“जिसे अपना बेटा मानते थे, उसी ने मेरी गोद उजाड़ दी।”
बहन खुद को दोषी मान रही है, हालांकि पुलिस ने साफ कहा है कि इसमें उसकी कोई गलती नहीं।
आरोपी की गिरफ्तारी
हत्या के बाद आरोपी फरार होने की कोशिश में था, लेकिन पुलिस ने कुछ ही घंटों में उसे धर दबोचा। पूछताछ में उसने साफ कबूल किया कि उसने यह कदम गुस्से और “इज़्ज़त” की खातिर उठाया।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्या पहले से प्लान की गई थी। आरोपी चाकू अपने साथ लेकर आया था।
समाज में गहरी चोट
यह घटना दिल्ली के लोगों के लिए सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं है। यह हमारी सोच पर भी एक गहरी चोट है। दिल्ली जैसे आधुनिक शहर में भी रिश्तों को लेकर इतनी हिंसा हो सकती है, यह चौंकाने वाली बात है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में समाज को बदलने की ज़रूरत है। प्यार या रिश्तों को लेकर खुलेपन और समझदारी की कमी ही ऐसे खून-खराबे की वजह बनती है।
बढ़ती हिंसा पर चिंता
दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि इस साल “पारिवारिक झगड़े” और “रिश्तों” से जुड़े अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। इनमें से ज़्यादातर मामलों में आरोपी वही होते हैं जिन्हें पीड़ित सबसे करीब मानता है – दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के लोग।
हर्ष विहार का यह केस इस सच्चाई की सबसे डरावनी मिसाल है।
निष्कर्ष
दोस्ती का रिश्ता सबसे मजबूत माना जाता है। लेकिन इस वारदात ने दिखा दिया कि जब गुस्सा और संकीर्ण सोच हावी हो जाती है, तो दोस्ती भी मौत में बदल सकती है।

