नई दिल्ली, 25 अगस्त — दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं ले रहा। नए पुलिस कमिश्नर सतीश गोलछा द्वारा भ्रष्टाचार पर कड़ा संदेश देने के बावजूद, उत्तर पश्चिम जिले के अशोक विहार थाने में सोमवार को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए हवलदार राजकुमार मीणा को सीबीआई ने रंगेहाथ गिरफ्तार किया। हवलदार ने यह रिश्वत सब-इंस्पेक्टर विशाल के कहने पर ली थी, जो मौके से फरार हो गया।
दिलचस्प बात यह रही कि जिस थाने में वसूली हुई, वह डीसीपी भीष्म सिंह के ऑफिस की ही इमारत में स्थित है, जिससे साफ है कि भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को आला अफसरों का भी कोई डर नहीं।
एटीओ लाइन हाज़िर, विशाल और हवलदार सस्पेंड
डीसीपी ने कार्रवाई करते हुए एडिशनल एसएचओ इंस्पेक्टर राजीव को लाइन हाज़िर, जबकि हवलदार राजकुमार मीणा और सब-इंस्पेक्टर विशाल को सस्पेंड कर दिया है।
ओमप्रकाश की शिकायत से फंसे पुलिसकर्मी
यह मामला वजीरपुर गांव निवासी ओमप्रकाश शांडिल्य की शिकायत के बाद उजागर हुआ, जिसने नारंग कॉलोनी के सूरज गोयल के साथ हुए 17 लाख रुपये की धोखाधड़ी मामले में एफआईआर दर्ज कराने के एवज में रिश्वत मांगे जाने की बात सीबीआई को बताई थी।
ओमप्रकाश दीप मार्केट एसोसिएशन का कथित पूर्व प्रधान है, जिस पर पहले भी अवैध कब्जे, जबरन वसूली और पुलिस से साठगांठ के आरोप लग चुके हैं। मार्केट में अवैध छत कब्जे से लेकर पार्किंग वसूली तक में उसका नाम सामने आता रहा है।
“पुलिस का यार” ही बन गया मुखबिर
ओमप्रकाश की दिल्ली पुलिस में गहरी पैठ मानी जाती है और वह कई मामलों को “निपटवाने” के लिए बदनाम है। ऐसे में उसी ने पुलिसवालों को फँसवाया, यह खुद पुलिस महकमे के लिए चौंकाने वाला है।

रिश्वत की रेट लिस्ट: कहां-कहां पकड़े गए पुलिसकर्मी
17 अगस्त: PCR इंचार्ज ASI वी ठाकुर और सिपाही राकेश 2000 की रिश्वत लेते पकड़े गए।
8 अगस्त: बिंदापुर थाने के हवलदार विजय सिंह को 15,000 की रिश्वत लेते विजिलेंस ने दबोचा।
शकूरपुर: खुलेआम शराब और सट्टा चलने पर सुभाष प्लेस के एसएचओ महेश कसाना लाइन हाज़िर किए गए।
2 जनवरी: हवलदार शिवहरि को खाने की रेहड़ी वाले से 10 हजार लेते सीबीआई ने पकड़ा, फिर भी कसाना बचे रहे।
1 अगस्त: इंस्पेक्टर सुनील जैन पर एक करोड़ की रिश्वत मांगने का आरोप, हरियाणा एंटी करप्शन ब्रांच ने 30 लाख लेते हुए गिरफ्तार किया।
सवालों के घेरे में आईपीएस अफसर
इस पूरे मामले ने आईपीएस अफसरों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्षों से भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को संरक्षण देने और निजी फायदे के लिए उन्हें “पालने” वाले अधिकारियों की वजह से ही पुलिस में भ्रष्टाचार नासूर बन चुका है।
क्या कमिश्नर सतीश गोलछा कुछ बदल पाएंगे?
पद संभालते ही कमिश्नर गोलछा ने सख्त चेतावनी दी थी कि रिश्वत के मामलों में डीसीपी और एसएचओ भी जिम्मेदार माने जाएंगे, लेकिन अशोक विहार की घटना ने उस चेतावनी को ठेंगा दिखा दिया है।
अब देखना होगा कि क्या नए पुलिस कमिश्नर सिर्फ सस्पेंशन से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करते हैं या दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार यूं ही बेलगाम चलता रहेगा।

