राजेंद्र स्वामी, दिल्ली दर्पण
नई दिल्ली, | दिल्ली के अशोक विहार फेज-2 में नगर निगम (एमसीडी) स्कूल की नवनिर्मित बिल्डिंग के लोकार्पण समारोह में दिल्ली बीजेपी के नेताओं और अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और महत्व पर जोर देते हुए एक नई सोच को सामने रखा। समारोह में दिल्ली के मेयर राजा इकबाल सिंह, स्थानीय सांसद प्रवीण खंडेलवाल, विधायक पूनम भारद्वाज, डिप्टी मेयर जय भगवान, स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा, जोन चेयरमैन विकेश सेठी, शिक्षा समिति अध्यक्ष योगेश वर्मा और डिप्टी चेयरमैन रवि हंस सहित कई अधिकारी मौजूद थे।


मेयर राजा इकबाल सिंह ने कहा, “सरकारी स्कूलों से ही बड़े-बड़े अधिकारी और नेता निकले हैं। हमें अपने बच्चों को भी सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए।” उनकी इस बात का सभी नेताओं ने समर्थन किया। विधायक पूनम भारद्वाज ने कहा, “निगम स्कूल सबसे बेहतर हैं। यहाँ की टीचर्स बच्चों को पढ़ाती ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने बच्चों की तरह संभालती हैं। हमें अपनी सोच बदलनी होगी।”इस अवसर पर बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया।

जोन चेयरमैन विकेश सेठी ने बच्चों को वैल्यू एजुकेशन देने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा, “बच्चों को कैसे बात करनी है, यह सिखाना जरूरी है।” वहीं, शिक्षा समिति अध्यक्ष योगेश वर्मा ने घोषणा की कि स्कूलों में कोई कमी नहीं रहेगी और 4 हजार कर्मचारियों को आउटसोर्स किया जाएगा।नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शिक्षा मॉडल को प्रचार और भ्रष्टाचार तक सीमित बताते हुए इसे एक मजबूत विकल्प से बदलने की बात कही।
हालांकि, समारोह में उठे सवालों ने सबका ध्यान खींचा: क्या नेता और अधिकारी सचमुच अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेंगे? क्या यह बयान केवल मंच तक सीमित रह जाएगा? और क्या दिल्ली का शिक्षा मॉडल अब एक नई दिशा ले पाएगा?यह समारोह न केवल एक नई इमारत का उद्घाटन था, बल्कि सरकारी स्कूलों के प्रति जनता का भरोसा बढ़ाने और निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी माना जा रहा है।

