नई दिल्ली:-तिहाड़ सेंट्रल जेल में अनमोल बिश्नोई के पहुंचते ही देश की सबसे हाई-सिक्योरिटी जेल एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गई है। अनमोल बिश्नोई की शिफ्टिंग के साथ ही जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को हाई अलर्ट पर डाल दिया है। खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि विरोधी गैंग्स की नजर अब सीधे अनमोल बिश्नोई पर है, जिससे तिहाड़ जेल के भीतर गैंगवार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
देश का कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में बंद है, जबकि उसका भाई अनमोल बिश्नोई अब दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया है। माना जा रहा है कि दोनों भाइयों की अलग-अलग जेलों में मौजूदगी के बावजूद गैंग का नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या अनमोल बिश्नोई तिहाड़ जेल से ही लॉरेंस बिश्नोई गैंग को और मजबूत करने के लिए किसी नए सिंडिकेट की नींव रख सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, अनमोल के जेल पहुंचते ही उसकी सुरक्षा को लेकर विशेष प्रबंध किए गए हैं। जेल प्रशासन को आशंका है कि विरोधी गैंग्स बदले की भावना से किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए अनमोल की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है और उसकी मूवमेंट को सीमित किया गया है।
इसी बीच गृह मंत्रालय ने अनमोल बिश्नोई को लेकर एक अहम और सख्त आदेश जारी किया है। शुक्रवार को जारी आदेश के तहत, सुरक्षा कारणों से BNS की धारा 303 के अंतर्गत अगले एक साल तक किसी भी राज्य की पुलिस या जांच एजेंसी अनमोल बिश्नोई की फिजिकल कस्टडी नहीं ले सकेगी। अब अगर किसी एजेंसी को अनमोल से पूछताछ करनी होगी, तो उसे तिहाड़ जेल में ही जाकर पूछताछ करनी पड़ेगी। यह आदेश उसकी जान को संभावित खतरे को देखते हुए लिया गया है।
दरअसल, अनमोल बिश्नोई ने पटियाला हाउस कोर्ट में यह दावा किया था कि उसे पाकिस्तान के गैंगस्टर और आतंकी शहजाद भट्टी से जान का खतरा है। कोर्ट में पेश की गई इस आशंका के बाद सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गईं। गौर करने वाली बात यह है कि इसी तरह का सुरक्षा आदेश पहले उसके भाई लॉरेंस बिश्नोई के लिए भी लागू किया गया था। लॉरेंस पिछले तीन वर्षों से साबरमती जेल में बंद है और उसे भी कभी जेल से बाहर नहीं ले जाया गया।
अनमोल बिश्नोई की तिहाड़ जेल में मौजूदगी अब न सिर्फ जेल प्रशासन के लिए, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तिहाड़ जेल के भीतर सुरक्षा संतुलन कैसे बनाए रखा जाता है और क्या गैंगवार की आशंका महज डर साबित होती है या कोई नई साजिश आकार लेती है।
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