Sunday, March 8, 2026
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लैंड-फॉर-जॉब केस: 13 अक्टूबर को बड़ा फैसला, राबड़ी देवी को दिल्ली कोर्ट का आदेश

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने बहुचर्चित लैंड-फॉर-जॉब स्कैम मामले में अगली सुनवाई की तारीख 13 अक्टूबर, 2025 तय की है। इस दिन अदालत यह फैसला सुनाएगी कि आरोप तय किए जाएंगे या लालू यादव और उनके परिवार को राहत मिलेगी। खास बात यह है कि अदालत ने सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है, जिसमें बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम भी शामिल है।

मामला कैसे शुरू हुआ?

2004 से 2009 तक लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री रहे। CBI का आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-D और अन्य पदों पर नौकरी देने के नाम पर उम्मीदवारों से जमीन ली गई। कहा जाता है कि ये जमीनें बाजार मूल्य से कहीं कम कीमत पर लालू परिवार को हस्तांतरित की गईं।

CBI का दावा है कि लालू यादव और उनके परिजनों ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए इन लेन-देनों को अंजाम दिया। कई लाभार्थियों ने नौकरी के बदले अपने परिवार की जमीनें पटना और अन्य जिलों में लालू परिवार से जुड़े लोगों के नाम कर दीं।

कोर्ट की हालिया कार्यवाही

अदालत ने यह साफ कर दिया है कि 13 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई डे-टू-डे बेसिस पर होगी। यानी अब तारीख पर तारीख वाली स्थिति नहीं रहेगी, बल्कि रोज़ाना सुनवाई कर इसे आगे बढ़ाया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सभी आरोपियों को केस से जुड़े दस्तावेजों की स्पष्ट और पढ़ने योग्य प्रतियां उपलब्ध कराई जाएँ। अगर जरूरत पड़ी, तो आरोपियों को कोर्ट रिकॉर्ड की कॉपी या स्कैन की सुविधा भी दी जाएगी।

इसके अलावा, ईडी (ED) ने इस केस में हाल ही में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसके आधार पर तीन और लोगों को सम्मन भेजा गया है।

राबड़ी देवी की स्थिति

राबड़ी देवी को कोर्ट ने साफ आदेश दिया है कि वे अगली सुनवाई पर खुद मौजूद रहें। इससे पहले उनके वकीलों ने कई बार दलील दी कि उन्होंने जमीन की खरीद-फरोख्त में वैध तरीके से पैसा दिया है और यह किसी भ्रष्टाचार का हिस्सा नहीं है। लेकिन अदालत अब प्रत्यक्ष उपस्थिति पर जोर दे रही है।

लालू परिवार की दलील

लालू प्रसाद यादव के वकीलों ने अदालत में कहा है कि यह मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उनका कहना है कि न तो कोई लिखित प्रमाण है कि लालू ने किसी को नौकरी दिलाने के लिए दबाव बनाया और न ही किसी रेलवे अफसर ने इसका बयान दिया।

उनके अनुसार, सभी जमीन सौदे वैध हैं और इनका सरकारी नियुक्तियों से कोई संबंध नहीं है।

राजनीति पर असर

बिहार की राजनीति में यह केस बेहद अहम माना जा रहा है। लालू यादव और उनका परिवार आज भी राज्य की राजनीति का बड़ा चेहरा है। ऐसे में अगर अदालत आरोप तय करती है, तो इसका सीधा असर उनकी राजनीतिक साख पर पड़ेगा। वहीं, अगर वे बरी होते हैं तो विपक्ष के भ्रष्टाचार के आरोप कमजोर पड़ सकते हैं।

13 अक्टूबर पर निगाहें

अब सबकी नजरें 13 अक्टूबर पर टिकी हैं। यह तारीख न सिर्फ लालू परिवार के लिए निर्णायक साबित होगी, बल्कि इससे पूरे देश को यह भी संदेश जाएगा कि क्या नौकरी के बदले जमीन जैसा घोटाला अदालत की नजर में ठोस सबूतों पर आधारित है या केवल राजनीतिक हथियार था।

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