दिल्ली में होने वाले MCD उपचुनाव का माहौल दिनोंदिन गर्माता जा रहा है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नज़दीक आती जा रही है, राजनीतिक पार्टियों ने अपना प्रचार तेज़ कर दिया है—लेकिन अगर किसी पार्टी ने इस उपचुनाव को लेकर सबसे ज्यादा आक्रामक रणनीति अपनाई है, तो वह है भारतीय जनता पार्टी (BJP)। पार्टी ने इस उपचुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानते हुए अपने मंत्री, सांसद और विधायकों को पूरी ताकत के साथ मैदान में उतार दिया है।
बीते कुछ दिनों से BJP के बड़े नेताओं की गतिविधियाँ अचानक तेज़ हुई हैं। विभिन्न वार्डों में लगातार हो रहे नुक्कड़-सभा, जनसम्पर्क और डोर-टू-डोर कैंपेन ने उपचुनाव की हवा को और तेज कर दिया है। पार्टी का लक्ष्य साफ़ है—दिल्ली की जनता के बीच यह संदेश पहुंचाना कि विकास कार्यों और पारदर्शिता के मामले में BJP ही भरोसेमंद विकल्प है।
मंत्री और सांसदों की मौजूदगी से BJP के स्थानीय प्रत्याशियों का मनोबल भी बढ़ा है। कई वार्डों में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं ने रोड शो निकाले, जिसमें स्थानीय निवासियों की बड़ी संख्या देखने को मिली। पार्टी रणनीतिक रूप से उन इलाकों पर विशेष फोकस कर रही है जहाँ पिछले चुनावों में मुकाबला बेहद कड़ा रहा था। इन जगहों पर BJP नेताओं की व्यक्तिगत मौजूदगी यह संकेत दे रही है कि पार्टी इस उपचुनाव के हर एक वोट को निर्णायक मान रही है।
इसके अलावा, युवा मोर्चा और महिला मोर्चा भी पूरी सक्रियता के साथ अभियान में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया से लेकर ग्राउंड लेवल पर चल रहे प्रचार के बीच BJP लगातार यह बताने की कोशिश कर रही है कि दिल्ली में सफाई व्यवस्था, सड़कें, पार्क, और स्थानीय समस्याओं का समाधान तभी होगा जब निगम में उनकी पकड़ मजबूत होगी। पार्टी के अनुसार, निगम के स्तर पर बेहतर प्रशासन के लिए एक स्थिर और सक्षम नेतृत्व की आवश्यकता है।
प्रचार के दौरान BJP नेता लगातार आप सरकार पर निशाना साध रहे हैं, आरोप लगा रहे हैं कि दिल्ली में विकास के बड़े दावे सिर्फ कागजों पर हैं, जबकि वास्तविकता जनता की परेशानियों में दिखती है। वहीं, BJP अपने उपलब्धियों का हवाला देते हुए यह संदेश देने में जुटी है कि उनकी सरकार के समय दिल्ली में पारदर्शी और तेज़ गति से काम हुए हैं।
कुल मिलाकर, BJP ने इस उपचुनाव को छोटी लड़ाई नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी राजनीतिक दिशा तय करने वाला मुकाबला मान लिया है। यही वजह है कि पार्टी का प्रचार अब सिर्फ तेज़ नहीं, बल्कि तूफानी हो चुका है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला और रोचक होने वाला है, क्योंकि जिस तरह राजनीतिक हलचल बढ़ रही है, उससे यह साफ झलक रहा है कि दिल्ली का MCD उपचुनाव किसी भी दृष्टि से मामूली नहीं है।
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