दिल्ली के शाहदरा में शनिवार की शाम आम दिनों जैसी ही थी। बाजार में हलचल थी, लोग अपने-अपने घर लौट रहे थे। दो नाबालिग बहनें भी उसी भीड़ का हिस्सा थीं—बेफिक्र, अपने रास्ते पर। लेकिन कुछ ही पलों में उनकी यह सामान्य शाम डर और दहशत में बदल गई।
फर्श बाजार इलाके के बिहारी कॉलोनी के पास अचानक दो नाबालिग लड़कों ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। पहले अभद्र टिप्पणियां की गईं, फिर हर कदम के साथ डर बढ़ता चला गया। बच्चियां सहम गईं। उनके लिए यह सिर्फ छेड़छाड़ नहीं थी, बल्कि अपनी सुरक्षा को लेकर एक गहरी घबराहट थी।
डरी हुई एक बहन ने कांपते हाथों से अपने चचेरे भाइयों को फोन किया। भाइयों ने देर नहीं की और तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बहनों का साथ दिया, उनके सामने दीवार बनकर खड़े हुए और गलत का विरोध किया। लेकिन शायद यही साहस हमलावरों को नागवार गुज़रा।
आरोप है कि लड़कों ने अपने दोस्तों को बुला लिया। थोड़ी ही देर में कई नाबालिग वहां इकट्ठा हो गए—कुछ के हाथों में लाठी थीं, कुछ के हाथों में पत्थर। देखते ही देखते माहौल हिंसक हो गया। सड़क पर चीख-पुकार गूंजने लगी, लोग अपने घरों के दरवाज़े बंद करने लगे।
बहनों के भाइयों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। जान बचाने के लिए एक भाई पास के घर में घुस गया, लेकिन गुस्सा इतना बेकाबू था कि उस घर पर भी पत्थर फेंके गए। पास में खड़ी एक स्कूटी को तोड़ दिया गया—जैसे यह साबित करने के लिए कि उस वक्त किसी को कुछ भी नहीं दिख रहा था।
इस पूरी घटना में नाबालिग भाई-बहनों को मामूली चोटें आईं, लेकिन जो चोट सबसे गहरी थी, वह मन पर लगी। डर, अपमान और असहायता की चोट—जो शायद लंबे समय तक उनके साथ रहेगी।
घटना के बाद इलाके में सन्नाटा और डर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब शाम होते ही माता-पिता अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं। लोग सवाल कर रहे हैं कि अगर बच्चे ही असुरक्षित हैं, तो भरोसा किस पर किया जाए?
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को काबू में लिया। पुलिस ने तीन नाबालिग आरोपियों को हिरासत में लिया है। सभी आरोपी नाबालिग हैं, इसलिए मामले की जांच किशोर न्याय अधिनियम के तहत की जा रही है।
यह घटना सिर्फ एक झगड़े की खबर नहीं है। यह उस डर की कहानी है, जो आज भी हमारी गलियों में सांस लेता है। यह याद दिलाती है कि बेटियों की सुरक्षा सिर्फ कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और इलाके में शांति बनाए रखने की कोशिश जारी है। पीड़ित परिवार बस यही चाहता है कि जो उन्होंने झेला, वह किसी और बच्चे को न झेलना पड़े।
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