नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटाए जाने और बोलने के समय पर पाबंदी लगाने के आदेश के बाद, सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पहली और बड़ी प्रतिक्रिया दी है। अपने सोशल मीडिया हैंडल पर जारी एक वीडियो संदेश में राघव ने बेहद सधे हुए लेकिन भावुक शब्दों में अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि वह बोलना नहीं चाहते थे, लेकिन जब उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए गए, तो चुप रहना नामुमकिन हो गया।
“पद बड़ा नहीं, अरविंद केजरीवाल का सिपाही होना बड़ी बात”
वीडियो की शुरुआत में राघव चड्ढा ने कहा, “मैं बोलना नहीं चाहता था, मगर चुप रहता तो बार-बार दोहराया गया झूठ भी सच लगने लगता।” उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके लिए कोई ‘डिप्टी लीडर’ जैसा पद मायने नहीं रखता। उनके लिए सबसे बड़ा गौरव अरविंद केजरीवाल का एक निष्ठावान सिपाही होना है। उन्होंने डॉ. अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि पार्टी में पद और जिम्मेदारियां आती-जाती रहती हैं।
बोलने पर रोक लगाने के आदेश पर जताई हैरानी
राघव चड्ढा ने सबसे ज्यादा दुख इस बात पर जताया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर उनके बोलने के समय पर रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा:
एक सांसद का सबसे बड़ा अधिकार और कर्तव्य सदन में जनता की आवाज उठाना होता है। यदि मुझे मेरे ही दल के कोटे से बोलने से रोका जा रहा है, तो यह केवल राघव चड्ढा की आवाज दबाना नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की आवाज को रोकना है जिन्होंने मुझे चुनकर भेजा है।
अनुशासनहीनता और ‘खामोशी’ पर दी सफाई
पार्टी के भीतर लग रहे अनुशासनहीनता के आरोपों पर राघव ने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी लाइन के खिलाफ काम नहीं किया। जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की रिहाई पर वह ‘गायब’ क्यों थे, तो उन्होंने बताया कि वह उस समय स्वास्थ्य कारणों से अस्वस्थ थे, लेकिन उन्होंने डिजिटल माध्यमों से अपनी खुशी साझा की थी। उन्होंने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया कि वह किसी और राजनीतिक दल में शामिल होने जा रहे हैं।
“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं”
राघव चड्ढा ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि वह सदन में एक साधारण सांसद के रूप में पंजाब और देश के मुद्दों को उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि समय कठिन जरूर है, लेकिन उनकी निष्ठा पार्टी और उसके सिद्धांतों के प्रति अटल है। इस बयान के बाद अब सबकी निगाहें आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर हैं कि क्या राघव चड्ढा की इस सफाई के बाद पार्टी अपना कड़ा रुख नरम करेगी?

