Wednesday, February 11, 2026
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बारिश से ठिठुरे दिल्ली-NCR के लोग, फरवरी में मौसम दिखाएगा भीषण गर्मी के तेवर

दिल्ली एनसीआर में रविवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। इलाकों में हुई हल्की से मध्यम बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे ठंड का असर बढ़ गया है। बीती रात भी कुछ क्षेत्रों में बारिश देखने को मिली, जिसने लोगों को सर्दी का एहसास फिर से करा दिया।

आज कैसा रहेगा मौसम?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 फरवरी को दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में मौसम बदला-बदला रह सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिन में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है।
दिन का अधिकतम तापमान 16 से 18 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि रात के समय तापमान गिरकर करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। इससे सुबह और रात के वक्त ठंड और ज्यादा महसूस हो सकती है।

फरवरी में सामान्य से ज्यादा रहेगी गर्मी

हालांकि, यह राहत ज्यादा दिनों तक रहने वाली नहीं है। आईएमडी ने चेतावनी दी है कि इस साल फरवरी का महीना सामान्य से अधिक गर्म रहने वाला है।
शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि देश के अधिकांश हिस्सों में फरवरी के दौरान अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा। साथ ही, इस दौरान बारिश भी औसत से कम होने की संभावना है।

उत्तर भारत में बढ़ेगा तापमान, बारिश होगी कम

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, फरवरी में उत्तर और मध्य भारत सहित देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहेगा।
केवल दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में ही मौसम सामान्य रह सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत—जिसमें दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड शामिल हैं—में मासिक वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है।

क्यों कमजोर रही सर्दी?

इस सर्दी के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की संख्या और तीव्रता दोनों ही कम रही। इसके चलते हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी भी देरी से हुई और वह भी 20 जनवरी के बाद। दिसंबर और जनवरी में बारिश और बर्फबारी की कमी के कारण पूरा सर्दी का मौसम अपेक्षाकृत शुष्क बना रहा।

गेहूं की फसल पर मंडरा रहा खतरा

आईएमडी प्रमुख ने रबी फसलों को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से गेहूं और जौ जैसी फसलें समय से पहले पक सकती हैं।
ऐसी स्थिति में बालियों में दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, जिससे दाने हल्के रह जाते हैं और कुल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी की कमी का सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से है।
हालांकि किसी एक कारण को चिन्हित करना मुश्किल है, लेकिन लंबे समय के आंकड़े साफ तौर पर ग्लोबल वार्मिंग और बदलते जलवायु पैटर्न की ओर इशारा करते हैं।

इस बार बारिश क्यों नहीं हुई?

महापात्र ने बताया कि जनवरी महीने में बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र का प्रभाव मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत तक सीमित रहा। इसके अलावा, प्रभावी पश्चिमी विक्षोभों की कमी ने मैदानी इलाकों में नमी और ठंड दोनों को कमजोर कर दिया।

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