दिल्ली में शनिवार शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास झोपड़ियों में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते सब कुछ तबाह कर दिया। लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में पूरा इलाका धुएं से भर गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे — किसी ने बच्चे को गोद में उठाया, किसी ने जरूरी सामान समेटने की कोशिश की, लेकिन वक्त ने किसी को मौका नहीं दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, आग रात करीब 10:56 बजे के आसपास लगी। शुरुआती चिंगारी ने जल्द ही विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते कई झोपड़ियां आग की लपटों में घिर गईं। मौके पर पहुंची दमकल विभाग की करीब एक दर्जन गाड़ियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
आग में कई परिवारों का सब कुछ — घर, कपड़े, दस्तावेज़, बच्चों की किताबें, रोज़ी-रोटी — सब जलकर राख हो गया। कुछ लोगों की आंखों में सिर्फ धुआं नहीं, बल्कि उस जिंदगी की परछाई भी थी जो अब राख में बदल चुकी है।
एक महिला रोते हुए बोली — “हम तो सालों से यहीं रह रहे थे। अब कहां जाएं? बच्चे छोटे हैं, घर नहीं रहा, खाने को कुछ नहीं।” पास खड़ा एक बुजुर्ग बस धुएं को देखता रहा, जैसे अब भी यकीन नहीं हो रहा कि उसकी झोपड़ी — जहां उसने ज़िंदगी के इतने साल गुज़ारे — अब सिर्फ राख बन गई है।
दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है, लेकिन आशंका है कि सिलेंडर लीक या शॉर्ट सर्किट की वजह से हादसा हुआ हो सकता है। फिलहाल मौके पर राहत और बचाव कार्य जारी है।
पुलिस ने इलाके को घेर लिया है और प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए जा रहे हैं। प्रशासन ने कहा है कि जिन परिवारों का नुकसान हुआ है, उन्हें जल्द से जल्द मदद दी जाएगी।
रिठाला की इस आग ने एक बार फिर शहर के उस चेहरे को उजागर किया है जो अक्सर नज़रों से ओझल रहता है — वो हिस्सा जहां लोग जिंदगी नहीं, जिंदा रहने की कोशिश करते हैं।
यह आग सिर्फ झोपड़ियों को नहीं, कई सपनों को भी राख कर गई है।

