दिल्ली दर्पण ब्यूरो: अपराधिक घटनाएँ और रिश्वतखोरी कोई नई बात नहीं है। लेकिन अपराध और रिश्वतखोरी की घटनाएँ लगातार बढ़ती ही जा रहीं हैं। रिश्वतखोरी का एक और मामला सामने आया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रिश्वतखोरी और ठगी का गिरोह चलने वाले यह लोग फर्ज़ी अधिकारी बनकर सरकारी दफ्तरों और आवासों में रहें हैं, इतना ही नहीं ये लोग उन प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी आते-जाते रहें हैं, जहाँ पर केवल अधिकृत व्यक्तियों का आना-जाना ही मान्य है।
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रिश्वतखोरी और ठगी का गिरोह चलाने वाले यह अपराधी पर CBI की पकड़ में आये तो यह पता चला कि इन आरोपियों ने रिश्वतखोरी और ठगी से अकूत दौलत हासिल कर ली है। कथित ठगों की पहचान अजीत कुमार पात्रा और मिंकु लाल जैन के रूप में हुई है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों ने कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी बताए हैं, जो कथित तौर पर इनके साथ मिले हो सकते हैं।
CBI ने जब मामले की गहराई से जाँच की तो पता चला कि ये दोनों आरोपी कथित तौर पर लोगों से काम करवाने के लिए मोटी रकम लेते थे। उन्हें उच्च अधिकारीओं से मिलवाले की बात करते थे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि ये लोगों को डराते और धमकाते भी थे। सीबीआई ने कहा कि पात्रा और जैन ने कई बार सरकारी परिसरों में वीआईपी प्रोटोकॉल का फायदा लिया।, विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों में वीआईपी बनकर शामिल हुए। दोनों खुद को केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारी बताकर धौंस जमाते थे।
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सीबीआई ने आरोपियों के पास से जब्त की अकूत दौलत

बीती 4 नवंबर को डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की एक टीम ने एक निजी कंपनी के सीईओ विनोद परिहार के ठिकानों पर छापेमारी की। गिरफ्तारी से बचने के लिए परिहार ने कथित तौर पर दोनों ठगों से संपर्क किया। आरोपियों ने परिहार से मामला सुलझाने के लिए 18 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। इसकी जानकारी सीबीआई को मिली तो सीबीआई ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से 18 लाख रुपए की रकम भी जब्त की गई है। सीबीआई ने दोनों के पास से अकूत दौलत भी जब्त की है, जिसमें 3.7 करोड़ रुपये की नकदी, करीब एक किलो सोने आभूषण, पात्रा और उसके रिश्तेदारों के नाम पर 26 संपत्तियों के दस्तावेज, चार लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गई हैं। इनके अलावा 12 अन्य वाहन, डिजिटल उपकरण भी दिल्ली, राजस्थान और ओडिशा के अलग-अलग ठिकानों से जब्त किए गए हैं।
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