दिल्ली दर्पण ब्यूरो
सिंगरौली अडानी समूह द्वारा धिरौली ब्लॉक के आठ गाँवों में किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसान संघर्ष समिति ने बांसी बेरदाह ग्राम में पाँचवीं ‘किसान पंचायत’ का आयोजन किया। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई इस पंचायत में आदिवासियों और किसानों ने एक स्वर में सरकार और अडानी समूह के खिलाफ हुंकार भरी। पंचायत में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि लगभग 6,600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और 1,400 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 6 लाख पेड़ों की कटाई अवैध है और इसे तत्काल रद्द किया जाना चाहिए।
किसान पंचायत को संबोधित करते हुए समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम ने एकजुटता पर ज़ोर देते हुए कहा कि कंपनियाँ डरा-धमकाकर या लालच देकर आंदोलनों को कुचलने का प्रयास करती हैं, लेकिन किसानों का संकल्प टूटने वाला नहीं है। वहीं, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए एलान किया कि मार्च के अंतिम सप्ताह में एक बार फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीण जागरूक न होते, तो 6 लाख पेड़ों की गुपचुप तरीके से कटाई कर ली गई होती।

महिला जिला अध्यक्ष सोनमती ने आदिवासियों की पीड़ा साझा करते हुए कहा कि हम अपने पुरखों की ज़मीन किसी भी कीमत पर अडानी को नहीं देना चाहते, लेकिन यदि सरकार ने बिना सहमति हमारी ज़मीन सौंपी है, तो हमें ज़मीन के बदले ज़मीन दी जाए या फिर 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ का मुआवज़ा मिले। इसके साथ ही प्रत्येक विस्थापित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की माँग भी उठाई गई। सोनमती ने यह भी बताया कि क्षेत्र के लोगों को राहुल गांधी के आने का इंतज़ार है, जिन्होंने मुलाकात के दौरान बांसी बेरदाह आने का आश्वासन दिया था।

पंचायत के दौरान अखिलेश शाह ने भी अपने विचार रखे और कहा कि फर्जी मुकदमों और जिला बदर जैसी कार्रवाइयों से आदिवासी समाज डरने वाला नहीं है, क्योंकि वे भगवान बिरसा मुंडा और टंट्या भील के वंशज हैं। प्रदेश सचिव निसार आलम अंसारी ने कहा कि समिति सड़क से लेकर न्यायालय तक इस अवैध अधिग्रहण के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। इस अवसर पर राजपाल सिंह, सोमारू सिंह मरकाम, अर्जुन सिंह मरकाम सहित कई वक्ताओं ने जल-जंगल-ज़मीन के संरक्षण का संकल्प लिया।

