MCD शिक्षा समिति के बड़े फैसले: 50 हजार नए दाखिलों का लक्ष्य, स्मार्ट बोर्ड और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर
बोर्ड और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर पिछले कार्यकाल की प्रमुख पहलें भी चर्चा में; 24 ‘निगम श्री स्कूलों’ के विकास, स्कूलों की मरम्मत और मेधावी विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने की योजना को मिली नई दिशा

राजेंद्र स्वामी, दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2026। दिल्ली नगर निगम (MCD) के स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की दिशा में शिक्षा समिति ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मंगलवार को शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा, एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्कूल चलो अभियान के तहत 50 हजार नए दाखिलों का लक्ष्य, बच्चों को संस्कारयुक्त एवं मूल्य आधारित शिक्षा देने के लिए शिक्षाविदों की समिति बनाने, स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगाने, मरम्मत कार्यों में तेजी लाने और सफाई एवं सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्णय निर्धारित समय-सीमा में लागू किए जाएं। बैठक में शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी, कर्मचारियों की भर्ती, ई-ऑफिस व्यवस्था और स्कूलों में जैविक कचरे के निस्तारण पर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। 50 हजार नए दाखिलों का लक्ष्य, हर स्कूल को 30 बच्चों का लक्ष्य
निगम के स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षा समिति ने सभी जोनों को ‘स्कूल चलो अभियान’ प्रभावी ढंग से चलाने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक स्कूल को चालू माह में कम से कम 30 नए बच्चों का दाखिला कराने का लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कहा गया है। इसके माध्यम से निगम के स्कूलों में कुल 50 हजार नए दाखिले सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा। शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि निगम के स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार करने के साथ शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार जरूरी है। अभिभावकों का विश्वास जीतने और अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षकों एवं अधिकारियों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी। मूल्य आधारित शिक्षा के लिए बनेगी शिक्षाविदों की समिति
बच्चों के शैक्षणिक विकास के साथ उनमें नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए शिक्षाविदों की एक विशेष समिति गठित की जाएगी। इस समिति के गठन का अधिकार शिक्षा समिति के अध्यक्ष को दिया गया है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसमें पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक शिक्षा और उपयोगी गतिविधियों को स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में शामिल करने के सुझाव दिए जाएंगे। रिपोर्ट पर शिक्षा समिति की आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उनके सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना है। पिछले कार्यकाल की प्रमुख पहल: 24 ‘निगम श्री स्कूल’
योगेश वर्मा के पिछले कार्यकाल में निगम की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आधुनिक स्कूलों के विकास और मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया। इसी दिशा में 24 ‘निगम श्री स्कूलों’ की पहल सामने आई, जिन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ विकसित करने की योजना बनाई गई। इन स्कूलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। योजना में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षण सुविधाएं, पुस्तकालय, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, खेल सुविधाएं और बेहतर सुरक्षा व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। शिक्षा समिति ने निगम के स्कूलों को उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों के स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्कूलों की मरम्मत और बुनियादी सुविधाओं के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की मंजूरी भी दी थी। इसके अतिरिक्त, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की निगरानी तथा वर्दी और स्टेशनरी के लिए सहायता से वंचित विद्यार्थियों तक राशि पहुंचाने जैसे विषयों पर भी कार्रवाई की गई। मेधावी विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने की योजना भी पिछले कार्यकाल की प्रमुख पहलों में शामिल रही। निगम की ओर से हर वर्ष पांचवीं कक्षा के 100 उत्कृष्ट विद्यार्थियों की पहचान करने और उनकी उपलब्धियों को सामने लाने की योजना घोषित की गई थी, ताकि प्रतिभाशाली बच्चों को आगे की पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल सकें। स्मार्ट बोर्ड और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार
बैठक में निगम द्वारा निर्मित नए स्कूलों में आधुनिक सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। संबंधित अधिकारियों को अगले महीने के भीतर प्रत्येक संबंधित स्कूल में पांच-पांच स्मार्ट बोर्ड लगाने, आवश्यक शौचालयों की व्यवस्था सुनिश्चित करने और नए वाटर कूलर स्थापित करने का काम पूरा करने को कहा गया। योगेश वर्मा ने कहा कि डिजिटल शिक्षण, स्वच्छ पेयजल और बेहतर शौचालय विद्यार्थियों के लिए अच्छे शैक्षणिक वातावरण की बुनियादी जरूरतें हैं। निगम के स्कूलों में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाकर पढ़ाई को अधिक प्रभावी और रोचक बनाया जाना चाहिए। स्कूलों को जीरो-वेस्ट बनाने की तैयारी
स्कूलों में स्वच्छता सुधारने और कचरे के उचित निस्तारण के लिए एरोबिन अथवा उपयुक्त जैविक कचरा प्रसंस्करण व्यवस्था स्थापित करने पर जोर दिया गया। इसके माध्यम से जैविक कचरे का स्कूल परिसर में ही निस्तारण कर उपयोगी खाद बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। समिति का उद्देश्य स्कूल परिसरों को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है, ताकि बच्चों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी विकसित हो सके। 15 दिनों में माइनर रिपेयर फंड जारी करने के निर्देश स्कूलों के भवनों, कक्षाओं, शौचालयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की मरम्मत में देरी दूर करने के लिए शिक्षा समिति ने माइनर रिपेयर का फंड अगले 15 दिनों के भीतर जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए। समिति का मानना है कि समय पर मरम्मत होने से स्कूलों में सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा तथा छोटी-मोटी समस्याओं के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी। 2,800 कर्मचारियों की भर्ती संबंधी फाइल 15 दिनों में पेश होगी स्कूलों की सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मल्टीटास्किंग स्टाफ के लगभग 2,800 कर्मचारियों की भर्ती संबंधी फाइल पर भी चर्चा हुई। अध्यक्ष ने अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करके फाइल अगले 15 दिनों में समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूलों की स्वच्छता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है। शिक्षकों की ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी जल्द लागू करने पर जोर
बैठक में शिक्षकों की स्थानांतरण नीति में सामने आई विसंगतियों पर भी चर्चा की गई। समिति ने अधिकारियों को ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी जल्द लागू करने और स्थानांतरण प्रक्रिया को पारदर्शी एवं नियमबद्ध बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अब तक किए गए स्थानांतरणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों को बताना होगा कि स्थानांतरण किन नियमों, मानदंडों और आधारों पर किए गए। योगेश वर्मा ने कहा कि ऑनलाइन व्यवस्था से प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और शिक्षकों को स्पष्ट नियमों के अनुसार स्थानांतरण का अवसर मिलेगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विसंगतियों को दूर करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने को कहा। ई-ऑफिस से होगा फाइलों का निस्तारण प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से फाइलों का संचालन करने के निर्देश दिए गए। फाइलों की प्रगति की नियमित निगरानी, समयबद्ध निस्तारण और अधिकारियों की सेवा संबंधी जानकारी को अद्यतन रखने पर भी जोर दिया गया। समिति के अनुसार, डिजिटल व्यवस्था के प्रभावी इस्तेमाल से अनावश्यक देरी कम करने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाने में मदद मिलेगी।

योगेश वर्मा बोले—निगम स्कूलों की पहचान बदलना हमारा लक्ष्य
शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा, एडवोकेट ने कहा, “हमारा लक्ष्य दिल्ली नगर निगम के विद्यालयों में आमूलचूल परिवर्तन लाना है। हम चाहते हैं कि निगम के स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता, आधुनिक सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और संस्कारयुक्त वातावरण के मामले में एक नई पहचान स्थापित करें।” उन्होंने कहा कि इसके लिए अधिकारियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को जवाबदेही के साथ काम करना होगा तथा प्रत्येक निर्णय को तय समय-सीमा में लागू करना होगा। वर्मा के अनुसार, निगम के स्कूलों को इस स्तर तक विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे, जहां अभिभावक अपने बच्चों को गर्व और विश्वास के साथ पढ़ने के लिए भेज सकें। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक, बच्चों के सर्वांगीण विकास और पारदर्शी प्रशासन को केंद्र में रखकर काम किया जाएगा। बैठक में शिक्षा समिति के सदस्यों ने भी विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव दिए। अंत में अध्यक्ष ने सभी सदस्यों और अधिकारियों का धन्यवाद करते हुए विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों, प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई से निगम की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकेगा।
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