नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग का आयोजन, वैश्विक भू-राजनीति और सुरक्षा सहयोग पर जुटे दिग्गज
विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत समेत विभिन्न देशों के प्रतिनिधि अहम अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर कर रहे हैं मंथन।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (एमएससी) द्वारा राष्ट्रीय राजधानी के द इंपीरियल होटल में दो दिवसीय 'म्यूनिख लीडर्स मीटिंग' (एमएलएम) का आयोजन किया जा रहा है। 4 और 5 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक में बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच दुनिया की उभरती और मध्य शक्तियों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हो रहा है। एमएससी के अध्यक्ष वोल्फगैंग इशिंगर की अध्यक्षता में आयोजित इस मंच पर करीब 100 वरिष्ठ निर्णयकर्ता और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई है। बैठक में भू-आर्थिक विकास, व्यापार और कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विषयों पर गंभीर चर्चा की जा रही है। सम्मेलन को बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और बीएमडब्ल्यू का भी समर्थन प्राप्त है।
इस प्रतिष्ठित बैठक में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हस्तियां शामिल हो रही हैं। इनमें जर्मनी के विदेश राज्य सचिव बर्नहार्ड कोट्श, फ्रांस के यूरोपीय मामलों के प्रतिनिधि मंत्री बेंजामिन हद्दाद, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री और एशिया सोसाइटी के सीईओ केविन रड तथा ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्य डेविड लैमी प्रमुख हैं। इसके साथ ही भाजपा के विदेश नीति विभाग के प्रमुख विजय चौथाईवाले और जलवायु वित्त विशेषज्ञ वेरा सोंगवे भी संवाद का हिस्सा बने हैं।
आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन के अधिकांश सत्र 'चैथम हाउस नियम' के तहत या ऑफ-द-रिकॉर्ड आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि विचारों का स्वतंत्र आदान-प्रदान हो सके। हालांकि, कुछ चयनित सत्रों की रिकॉर्डिंग एमएससी के डिजिटल चैनलों पर उपलब्ध कराई जाएगी। सम्मेलन के मीडिया पार्टनर के तौर पर इंडिया टुडे ग्रुप द्वारा प्रतिभागियों के संवाद और नेटवर्किंग के लिए 'एलीफेंट कैफे' का संचालन किया जा रहा है।
मुख्य कार्यक्रम के साथ ही वोल्फगैंग इशिंगर द्वारा बुलाई गई 'टेक स्ट्रैटेजी इनिशिएटिव' (टीएसआई) की बैठक भी आयोजित की जा रही है। सिलिकॉन वैली में अपनी शुरुआती बैठक के बाद, इस पहल से जुड़े नीति-निर्माता और सुरक्षा विशेषज्ञ रणनीतिक तकनीकों के प्रभावों पर मंथन कर रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से आर्टिफिशियल सुपरइंटेलिजेंस (एएसआई) की होड़ से वैश्विक शक्ति संतुलन और ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की जा रही है।
इस बैठक से पूर्व 1 अक्टूबर को एमएससी ने मध्य शक्तियों के सहयोग पर एक नई रिपोर्ट जारी की थी। इस अध्ययन में पश्चिमी और ग्लोबल साउथ के 11 देशों के सर्वेक्षण आंकड़ों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि बदलते वैश्विक क्रम में उभरती और मध्य शक्तियों का सहयोग अंतरराष्ट्रीय समस्याओं के समाधान में क्या भूमिका निभा सकता है।
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