नोएडा में जीएसटी की महिला अधिकारी पर 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप, विभाग ने नकारा
ग्रेटर नोएडा में कार्गो वाहन जब्त किए जाने के बाद ट्रांसपोर्टर ने लगाया रिश्वतखोरी का आरोप, जीएसटी अधिकारियों ने बताया निराधार।

ग्रेटर नोएडा में एक मालवाहक वाहन को जब्त किए जाने के बाद वस्तु एवं सेवा कर विभाग की एक महिला अधिकारी पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। वाहन मालिक का दावा है कि पक्का बिल दिखाने के बावजूद उनकी गाड़ी रोकी गई और अवैध मांग की गई। वहीं दूसरी तरफ, जीएसटी विभाग के उच्चाधिकारियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कार्रवाई को पूरी तरह नियमसंगत बताया है।
सेक्टर बीटा-1 के निवासी सजेंद्र कुमार के मुताबिक, उनकी इको कार्गो गाड़ी को 27 अक्तूबर को ऑनलाइन माध्यम से बुक किया गया था। गाड़ी चालक ने तय वेयरहाउस से सामान लोड किया और जैसे ही वह परिसर के गेट पर पहुंचा, वहां मौजूद जीएसटी अधिकारियों ने गाड़ी को रोक लिया। चालक द्वारा सूचना दिए जाने के बाद वाहन मालिक भी मौके पर पहुंचे थे।
सजेंद्र कुमार का आरोप है कि अधिकारियों ने वाहन में लदे सामान के आधार पर दो लाख रुपये का जुर्माना तय किया और 50 हजार रुपये अतिरिक्त रिश्वत के रूप में मांगे। उन्होंने दावा किया कि मौके पर अधिकारियों को माल का पक्का बिल भी दिखाया गया था, लेकिन इसके बावजूद कुल 2.50 लाख रुपये की मांग की गई। इस पूरे विवाद से जुड़े कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पीड़ित पक्ष महिला अधिकारी पर जबरन कार्रवाई का आरोप लगाता दिख रहा है, जबकि अधिकारी नियमों के तहत कदम उठाने की बात कह रही हैं।
दूसरी ओर, जीएसटी विभाग ने वाहन मालिक के सभी दावों का खंडन किया है। जीएसटी के अपर आयुक्त (ग्रेड-2) संजय कुशवाह के अनुसार, जांच के दौरान पकड़ी गई कार में सिगरेट लदी हुई थी। उन्होंने बताया कि मौके पर मौजूद लोगों की तरफ से माल से जुड़ा कोई भी वैध बिल प्रस्तुत नहीं किया गया था।
अपर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नियमों के तहत बिना बिल माल ले जाने की स्थिति में वाहन और सामग्री दोनों को जब्त किया जाता है, जिसके तहत ही दो लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है। उन्होंने महिला अधिकारी पर लगे 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार करार दिया है।
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