दिल्ली की एक व्यस्त सड़क पर हुआ हादसा हर किसी को झकझोर कर गया। तेज़ रफ्तार BMW ने ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी अफसर की जान ले ली। पलभर में हंसी-खुशी का माहौल मातम में बदल गया। सवाल अब सिर्फ इतना है – इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार महिला ड्राइवर को कितनी बड़ी सज़ा मिलेगी?
हादसे की रात का मंजर
रात का समय था। सड़क पर ट्रैफिक कम था और हवा में हल्की ठंडक थी। सरकारी अफसर अपने काम में मशगूल थे। अचानक, गड़गड़ाहट की आवाज़ आई और देखते ही देखते BMW कार ने उन्हें इतनी ज़ोर से टक्कर मारी कि लोगों की चीखें निकल गईं।
पास खड़े चश्मदीद बताते हैं –
“हमने देखा कि गाड़ी काफी तेज़ थी। ड्राइवर गाड़ी पर कंट्रोल ही नहीं रख पाई। टक्कर इतनी भयानक थी कि सब कुछ कुछ ही सेकंड में खत्म हो गया।”
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची। महिला ड्राइवर को वहीं से गिरफ्तार कर लिया गया और गाड़ी को ज़ब्त कर लिया गया। पुलिस ने सबसे पहले मेडिकल टेस्ट करवाया ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं महिला शराब या नशे की हालत में तो नहीं थी।
कौन है महिला ड्राइवर?
जांच में सामने आया है कि महिला दिल्ली के एक सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखती है। गाड़ी उसके नाम से रजिस्टर्ड है और ड्राइविंग लाइसेंस भी वैध है। लेकिन अब सवाल उठता है – क्या बड़े घर की गाड़ी और लाइसेंस होने से किसी की ज़िंदगी की कीमत कम हो जाती है?
लोगों का गुस्सा साफ है – “ये सड़कें सबकी हैं, इन्हें किसी का प्राइवेट रेस ट्रैक मत समझो।”
पीड़ित परिवार का दर्द
अफसर के घर पर मातम पसरा है। परिवारवालों की आंखें आंसुओं से भरी हुई हैं। उनकी पत्नी ने कहा –
“उन्होंने ज़िंदगीभर ईमानदारी से काम किया। लेकिन किसी और की लापरवाही ने उनकी जान ले ली। हमें सिर्फ न्याय चाहिए।”
उनके बच्चे बार-बार यही सवाल कर रहे हैं – “पापा क्यों नहीं लौट रहे?”
यह सवाल सुनकर हर किसी का दिल पिघल जाता है।
क्या हो सकती है सज़ा?
कानूनी जानकार बताते हैं कि अभी महिला पर धारा 279 (लापरवाही से गाड़ी चलाना) और 304A (लापरवाही से मौत का कारण बनना) लगाई गई है। इन धाराओं में सज़ा कम होती है।
लेकिन अगर यह साबित हो गया कि महिला ने गाड़ी जानबूझकर तेज़ रफ्तार में और खतरनाक ढंग से चलाई, तो उस पर गैर-इरादतन हत्या (धारा 304 IPC) लगेगी। इसमें 10 साल तक की सज़ा संभव है।
जनता का गुस्सा
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ दिख रहा है। कई लोगों ने लिखा –
“अगर आज सख्त सज़ा नहीं दी गई, तो कल कोई और इस लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाएगा।”
लोग चाहते हैं कि कोर्ट इस बार कोई ढिलाई न दिखाए और कड़ा उदाहरण पेश करे।
आगे की राह
महिला को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जा चुका है। CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट इस केस की दिशा तय करेंगे।
अब नज़रें कोर्ट पर हैं कि यह केस महज़ सड़क हादसा माना जाएगा या फिर इसे जानलेवा ड्राइविंग मानकर सख्त सज़ा सुनाई जाएगी।
निचोड़
यह हादसा सिर्फ एक अफसर की मौत की खबर नहीं है। यह हमें याद दिलाता है कि सड़क पर एक सेकंड की लापरवाही कितनी ज़िंदगियां तबाह कर सकती है।

