आध्यात्मिक गुरु परम संत महात्मा डॉ सुरेश जी महाराज के सानिध्य में व अखिल भारतीय संतमत सत्संग दिल्ली के तत्वाधान में संत यशरूप तपोभूमि परिसर , ग्राम अनंगपुर फरीदाबाद में तीन दिवसीय आवासीय ध्यान योगाभ्यास शिविर की शुरुआत 72 घंटे के अखंड शांतिपाठ व गुरुपूजन से हुई। इन कार्यक्रमों में गुरु शिष्य परंपरा पर टोली चर्चा, ध्यान योगाभ्यास, रामधुन, व दीक्षांत समारोह जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होंगे जिसमें देश विदेश से हजारों लोग भाग लेने आ चुके हैं।
इस अवसर पर आध्यात्मिक गुरु डॉ सुरेश भईया जी ने कहा गुरु हमें सफलता की राह दिखाते हैं, आत्मा की शांति, मोक्ष और ईश्वर से जुड़ने का मार्ग बताते हैं। वे हमारे अंतर्मन के भ्रम, भय और संशय को दूर करते हैं। कबीरदास कहते हैं:
“सतगुरु मिला तो सब मिला, नहीं तो सब सून।
अंधे को घर क्या दिखे, दीपक दे हाथुन॥”


जब जीवन संकटों से घिरा होता है, मन दिशाहीन होता है, तब कोई परमज्ञानी महापुरुष एक सच्चे आध्यात्मिक गुरु हमारी आत्मा को झकझोरते हैं और एक नई चेतना का संचार करते हैं।
शंकराचार्य, रामकृष्ण परमहंस, विवेकानंद, महर्षि अरविंद, श्री रामचंद्र जी महाराज, श्री बृजमोहन लाल जी महाराज, महात्मा श्री यशपाल जी महाराज और अनेक संतों ने समय-समय पर समाज को अध्यात्म का प्रकाश दिया है।
आज के समय में जब जीवन की दौड़ तेज है और मानसिक शांति कम होती जा रही है, तब गुरु का महत्व और भी अधिक हो जाता है। चाहे वह विद्यालय का शिक्षक हो, जीवन में मार्गदर्शन देने वाला कोई व्यक्ति, या फिर कोई परमात्मा से जोड़ने वाला आध्यात्मिक गुरु हर एक हमें ऊँचाई पर ले जाने में सहायक होता है।
गुरुपूर्णिमा पर हम न केवल धन्यवाद प्रकट करते हैं, बल्कि संकल्प लेते हैं कि हम गुरु द्वारा दिखाए गए पथ पर आस्था, अनुशासन और समर्पण के साथ चलेंगे।
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः

