दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। जहरीली हवा से परेशान राजधानी के हालात पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मौजूदा दिल्ली सरकार और केंद्र पर जमकर निशाना साधा है। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि प्रदूषण के समाधान की ओर ध्यान देने के बजाय सरकारें केवल टैक्स वसूलने में व्यस्त हैं।
दिल्ली में लगातार कई दिनों से एयर क्वालिटी ‘सीवियर’ श्रेणी में बनी हुई है। शहर के कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। इसी बीच केजरीवाल ने सोशल मीडिया और मीडिया इंटरैक्शन में कहा कि जनता साफ हवा की उम्मीद करती है, लेकिन उन्हें केवल नए टैक्स और जुर्मानों का बोझ दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदूषण के मूल कारणों पर काम करने की जरूरत है—जैसे पराली प्रबंधन, निर्माण धूल नियंत्रण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, और औद्योगिक उत्सर्जन पर सख्त कार्रवाई। लेकिन इसके बजाय सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिनका ज़मीनी असर बहुत कम है। केजरीवाल के मुताबिक, “वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है, लेकिन सरकार समाधान के बजाय फाइन और टैक्स बढ़ाने में लगी है, जिससे लोगों की जेब पर और बोझ पड़ रहा है।”
केजरीवाल का यह बयान उस समय आया है जब दिल्ली के कई स्कूलों को ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर ऑनलाइन मोड अपनाने की सलाह दी गई है। अस्पतालों में अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। कई इलाकों में वायु प्रदूषण के कारण सुबह-शाम धुंध की परत छाई रहती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि हर साल दिल्ली ऐसे ही प्रदूषण संकट से जूझती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान पर पर्याप्त काम क्यों नहीं हो रहा। उन्होंने दावा किया कि सरकारें सिर्फ कागजों पर योजनाएं बनाती हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर उनका असर कम दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण का मुद्दा राजनीति से ऊपर उठकर गंभीर स्वास्थ्य संकट के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस बीच, सरकारी एजेंसियों ने दावा किया है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू है और कई कदम उठाए गए हैं, जैसे निर्माण गतिविधियों पर रोक, डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध और सड़क पर पानी का छिड़काव। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह कदम पर्याप्त नहीं हैं।
दिल्ली की हवा पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार अधिक खराब बताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्थानीय प्रदूषण स्रोतों के अलावा पराली जलने, वाहनों की संख्या बढ़ने और मौसम के बदलते पैटर्न का भी बड़ा असर है।
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