- दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली के निजी स्कूलों के लिए बने ‘नया फीस रेगुलेशन एक्ट 2025’ की कानूनी वैधता को लेकर चल रही खींचतान के बीच हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस अधिनियम या इसके नियमों पर अंतरिम रोक (Stay) लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
इन प्रमुख संस्थाओं की याचिकाओं पर हुई सुनवाई:
अदालत में आज कई महत्वपूर्ण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई, जिनमें DPS सोसाइटी, रोहिणी एजुकेशन सोसाइटी, जस्टिस फॉर ऑल, कैथोलिक सोसाइटी, फोरम ऑफ माइनॉरिटी और रेयान ग्रुप ऑफ स्कूल्स शामिल थे। निजी स्कूलों का तर्क था कि अधिनियम के कुछ प्रावधान उनकी स्वायत्तता को प्रभावित करते हैं। - 20 जनवरी तक बढ़ी समय सीमा:
सुनवाई के दौरान शिक्षा निदेशालय (DOE) के वकील ने अदालत को सूचित किया कि स्कूल स्तर पर ‘फीस रेगुलेशन कमिटी’ गठित करने की अंतिम तिथि को 10 दिनों के लिए बढ़ाया जा रहा है। कोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि अब सभी संबंधित स्कूल 20 जनवरी तक अपनी कमिटी का गठन कर लें।
कानूनी वैधता पर होगी अगली बहस:
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ‘नया फीस रेगुलेशन एक्ट 2025’ की संवैधानिक वैधता की जांच तभी करेगी जब सरकार (Respondents) इस मामले में अपना विस्तृत जवाब दाखिल कर देगी। तब तक स्कूलों को मौजूदा आदेशों का पालन करना होगा।
फीस रेगुलेशन एक्ट 2025: हाई कोर्ट का रोक लगाने से इनकार, स्कूलों को कमिटी गठन के लिए मिला 10 दिन का अतिरिक्त समय
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