कराची की रहने वाली निकिता नागदेव की ज़िंदगी पिछले चार सालों में पूरी तरह बदल चुकी है। कभी प्यार से शुरू हुई उनकी शादी आज सीमा, पासपोर्ट और कानूनी कागज़ों की भंवर में उलझी एक बड़ी लड़ाई बन चुकी है। और इसी लड़ाई को लड़ते-लड़ते अब उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे मदद की गुहार लगाई है।
निकिता का कहना है कि उनका पति विक्रम नागदेव, जो भारत के इंदौर और दिल्ली से जुड़ा है, उन्हें छोड़कर दिल्ली में किसी और महिला से शादी करने जा रहा है।
उनकी आवाज़ में दर्द साफ़ झलकता है—
“मैं सिर्फ़ न्याय चाहती हूँ। आज मुझे इंसाफ नहीं मिला तो कई महिलाओं का भरोसा टूट जाएगा।”
प्यार से शुरू हुई शादी… और फिर आया वो मोड़ जिसने सब बदल दिया
26 जनवरी 2020 — जब दुनिया के लिए यह एक सामान्य दिन था, निकिता और विक्रम ने कराची में हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाई। परिवार खुश था, सपने बड़े थे, और भविष्य सुंदर लग रहा था।
एक महीने बाद, विक्रम उन्हें भारत लेकर आया। नई जगह, नए लोग—लेकिन निकिता उम्मीदों से भरी हुई थीं।
पर कुछ ही महीनों बाद उन्हें महसूस हुआ कि कुछ बदल रहा है।
रवैया, बातें, व्यवहार—सब अचानक अनजान सा हो गया।
अफेयर की बात पर मिला चुभता हुआ जवाबनिकिता को जल्द ही पता चला कि उनके पति का परिवार के एक रिश्तेदार के साथ अफेयर चल रहा है। हिम्मत जुटाकर उन्होंने यह बात ससुर को बताई।
लेकिन जवाब सुनकर उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई—
“लड़कों के अफेयर्स होते हैं… इसमें क्या किया जा सकता है?”
उस एक वाक्य ने उनकी पूरी दुनिया को हिला दिया।
कोविड लॉकडाउन—और सबसे बड़ा झटका
लॉकडाउन के दौरान, तनाव और बढ़ा।
9 जुलाई 2020 को विक्रम ने वीज़ा की तकनीकीता का बहाना बनाकर निकिता को अटारी बॉर्डर पर अकेला छोड़ दिया और पाकिस्तान भेज दिया।
उस पल को याद करते हुए निकिता आज भी टूट जाती हैं—
“मैंने सोचा था वो मुझे लेने आएगा… लेकिन उसने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।”
इसके बाद विक्रम ने उन्हें दोबारा बुलाने की कोई कोशिश नहीं की।
कराची में मिली हैरान कर देने वाली खबर
कराची लौटने के कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि विक्रम दिल्ली की एक महिला से दूसरी शादी की तैयारी कर रहा है।
एक पल को निकिता को यकीन ही नहीं हुआ कि जिसके लिए वह अपना घर छोड़कर आई थीं, वही उन्हें ऐसे छोड़ सकता है।
27 जनवरी 2025 को उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराई और इंसाफ की लड़ाई शुरू की।
भारत—पाकिस्तान के नियमों में फँसा ‘निकिता–विक्रम’ का केस
मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से अधिकृत सिंधी पंच मध्यस्थता केंद्र पहुँचा।
नोटिस भेजे गए, सुनवाई हुई—पर न कोई सुलह, न कोई ठोस नतीजा।
30 अप्रैल 2025 की रिपोर्ट में कहा गया कि
- दोनों भारतीय नागरिक नहीं हैं
- इसलिए मामला पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र में आता है
- और विक्रम को पाकिस्तान डिपोर्ट करने की सिफारिश की गई
इंदौर सोशल पंचायत ने भी यही सुझाव दिया।
लेकिन प्रक्रिया धीमी है… और निकिता टूट रही हैं
कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा है कि कार्रवाई रिपोर्ट के आधार पर होगी।
लेकिन निकिता के लिए हर दिन इंतज़ार में गुजरता है।
उनकी आवाज में आज भी वही पीड़ा है—
“मैं सिर्फ़ इतना चाहती हूँ कि जिसे मैं पति मानकर भारत आई… वो मेरी ज़िंदगी से ऐसे गायब न हो जाए।”
अब आख़िरी उम्मीद—प्रधानमंत्री मोदी
निकिता जानती हैं कि यह केवल उनके रिश्ते की लड़ाई नहीं है।
यह एक ऐसी महिला की लड़ाई है जो सरहद पार कर अपने हक़ की आवाज़ उठा रही है।
इसलिए अब वे सीधे PM मोदी से मदद मांग रही हैं।
“मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी मेरी बात सुनेंगे… और मुझे न्याय दिलाएँगे।”
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