-K और L ब्लॉक समेत कई पार्कों में गंदगी और अंधेरे का अंबार; छापेमारी से पहले ही नशेड़ियों के फरार होने पर पुलिस की भूमिका संदिग्ध
नई दिल्ली | दिल्ली दर्पण टीवी ब्यूरो,
वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी में मर्डर के बाद भड़के राजनीतिक विवाद के बीच कल देर रात स्थानीय विधायक पूनम भारद्वाज ने भारी पुलिस बल के साथ इलाके के दर्जनों पार्कों और संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। दिल्ली दर्पण टीवी के कैमरों में कैद हुई यह ‘लाइव रेड’ जेजे कॉलोनी के सेंट्रल पार्क से शुरू होकर K और L ब्लॉक समेत कई अन्य ब्लॉकों के पार्कों तक पहुँची।
नशेड़ियों के लिए ‘सेफ हेवन’ बने पार्क विधायक की छापेमारी के दौरान इलाके के पार्कों की जो सूरत दिखी, उसने व्यवस्था की धज्जियाँ उड़ा दीं। सेंट्रल पार्क का मुख्य गेट जंजीरों से बंद था और अंदर केवल एक व्यक्ति के घुसने की जगह छोड़ी गई थी। विधायक ने पाया कि किसी भी पार्क में न तो घास थी, न पेड़-पौधे और न ही रोशनी का कोई इंतजाम। हर तरफ अंधेरा और कूड़े के ढेर लगे थे, जो नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों के लिए एक आदर्श माहौल तैयार कर रहे थे।
छापेमारी की सूचना लीक होने का शक हैरानी की बात यह रही कि विधायक और पुलिस की इतनी बड़ी टीम के पहुंचने से पहले ही पार्कों से असामाजिक तत्व गायब हो चुके थे। विधायक पूनम भारद्वाज ने इस पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। ऐसा प्रतीत होता है कि इस ‘औचक रेड’ की सूचना अपराधियों को पहले ही मिल चुकी थी, जिससे वे समय रहते फरार होने में कामयाब रहे।
जनता का फूटा दर्द: “रहना हुआ मुहाल” भले ही रेड के दौरान अपराधी हाथ नहीं आए, लेकिन स्थानीय निवासियों ने बेबाकी से अपनी आपबीती सुनाई। लोगों ने कैमरे पर खुलकर कहा कि जेजे कॉलोनी में अब अपराधियों और नशेड़ियों के कारण रहना मुश्किल हो गया है। असामाजिक तत्वों का जमावड़ा केवल पार्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलाके के मुख्य चौकों पर भी इनका कब्जा रहता है।
जवाबदेही किसकी? पार्कों में सफाई, लाइट और सुरक्षा की इस घोर अनदेखी ने निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी और स्थानीय पुलिस प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। ‘K’ और ‘L’ ब्लॉक के पार्कों की बदहाली यह बताने के लिए काफी है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ चुके हैं।
पूनम भारद्वाज ने अंत में पुलिस के बीट ऑफिसर्स को अंतिम चेतावनी दी कि यदि अब सड़कों या पार्कों में कोई भी आवारा तत्व नज़र आया, तो वे मामले को डीसीपी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से होते हुए सीधे गृह मंत्रालय तक ले जाएंगी।

