– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली के वजीरपुर जेजे कॉलोनी में एक बार फिर कानून का खौफ खत्म होता नजर आया। यहाँ महज एक छोटी सी गुजारिश—”बारात के लिए रास्ता दे दो”—के बदले में एक मासूम परिवार को उम्र भर का गम मिल गया। नशे में धुत करीब 20 अपराधी किस्म के लोगों ने लाठी-डंडों, बेल्ट और पत्थरों से दो भाइयों पर ऐसा कहर बरपाया कि 46 वर्षीय मोहन की जान चली गई और दुसरा भाई बुरी तरह घायल है। यह भरी फरीदाबाद से शादी में शामिल होने आया था।
खुशियों वाले घर में मातम का तांडव
मृतक मोहन एक मॉल में इलेक्ट्रीशियन थे और उनके घर में बेटी की शादी की तैयारियाँ चल रही थीं। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने झगड़ रहे कुछ असामाजिक तत्वों से रास्ते से हटने को कहा था। उन ‘नशेड़ियों’ ने अपनी आपसी लड़ाई छोड़ दी और इन दोनों भाइयों पर टूट पड़े। इस हमले ने तीन छोटी बेटियों के सिर से पिता का साया छीन लिया। आज पूरा इलाका दहशत में है और सवाल पूछ रहा है कि क्या ‘शरीफ’ होना इस शहर में गुनाह है?
सियासत और मीडिया के चश्मे पर सवाल
अभी हाल ही में उत्तम नगर की एक घटना पर मुख्यमंत्री मृतक के घर सांत्वना देने और मुआवजा देने पहुँचे थे। लेकिन वज़ीरपुर की इस जेजे कॉलोनी की गलियों में फैले खून पर क्या सत्ता का कैमरा चमकेगा?
बड़ा सवाल यह है कि:
- क्या मुख्यमंत्री या कोई बड़ा नेता मोहन के अनाथ बच्चों का हाथ थामने वज़ीरपुर आएगा?
- क्या मीडिया को इस खबर में दिलचस्पी होगी, या यहाँ ‘हिंदू-मुस्लिम’ एंगल न होने के कारण इसे ‘मामूली आपसी झगड़ा’ बताकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
- जेजे कॉलोनियों में पनप रहे नशे के कारोबार और गुंडागर्दी पर पुलिस कब तक मौन साधे रहेगी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ गुंडागर्दी आम बात हो गई है। मृतक स्थानीय निगम पार्षद का रिश्तेदार था, इसके बावजूद अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे। यदि रसूखदार परिवारों के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिक की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा ?
यह भी पढ़ें:- https://delhidarpantv.com/big-action-taken-against-awadh-liquor-in-dalal-15-lakh-bottles-seized-816-firs-registered/

