दिल्ली की हलचल, ट्रैफिक की आवाज़ें और गलियों में गूंजती बच्चों की खिलखिलाहट – सब कुछ उस दिन थम गया, जब एक चार साल का मासूम अपनी ही गली से गायब हो गया। परिवार ने सोचा होगा कि शायद बच्चा पास के पार्क में खेल रहा होगा, पर उन्हें क्या पता था कि कुछ घंटों बाद वही बच्चा lifeless हालत में मिलेगा।
गुमशुदगी से मातम तक का सफर
वो शाम किसी आम दिन जैसी ही थी। मोहल्ले के लोग अपने-अपने कामों में लगे थे। बच्चे खेल रहे थे और बड़े गपशप में मशगूल थे। तभी एक मां अपने बेटे को पुकारने लगी – “कहाँ हो बेटा? आ जाओ खाना ठंडा हो रहा है।”
पुकार पर कोई जवाब नहीं आया। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, बेचैनी बढ़ती गई। मोहल्ले के लोग टॉर्च लेकर हर गली, हर कोने में ढूंढने लगे।
जब पुलिस तक बात पहुँची और तलाश तेज़ हुई, तभी कुछ ऐसा मिला जिसने सबको दहला दिया। बच्चा अब इस दुनिया में नहीं था। उसके छोटे-छोटे हाथ, वो मासूम चेहरा और अधूरी हंसी – सब कुछ खामोश हो गया।
15 साल का पड़ोसी शक के घेरे में
पुलिस की जांच ने सबको और चौंका दिया। शक मोहल्ले के ही 15 साल के एक किशोर पर गया। जो बच्चा कल तक सबके साथ खेलता था, वही आज शक के दायरे में है।
लोग कहते हैं कि वह लड़का अक्सर गुस्सैल रहता था। कई बार बच्चों से झगड़ता और छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाता। लेकिन किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन उसका गुस्सा किसी मासूम की जान ले लेगा।
मोहल्ले में पसरा सन्नाटा
उस रात मोहल्ले की गलियां अजीब खामोशी से भरी थीं। जहां कल तक बच्चों की आवाज़ें गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ़ सिसकियाँ सुनाई दे रही थीं।
एक पड़ोसी महिला ने रोते हुए कहा:
“बच्चा हमारे घर भी खेलता था। हमें समझ नहीं आता कि इतनी छोटी उम्र में कोई इतना बड़ा गुनाह कैसे कर सकता है।”
मां की चीखें, पिता का टूटना
घर का हाल किसी को रुला देने के लिए काफी था। मां बार-बार बेहोश हो जातीं, और होश में आते ही चीखतीं –
“मेरा बच्चा तो अभी ठीक से बोलना भी नहीं सीख पाया था… किसने इतनी बेरहमी से उसे मुझसे छीन लिया?”
पिता चुपचाप दीवार को ताकते रहे। उनके चेहरे पर आंसू भी सूख चुके थे। वो बस इतना कह पाए –
“वो हमारा इकलौता सहारा था। अब हम किसके लिए जियेंगे?”
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने तेजी दिखाते हुए इलाके को घेर लिया। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच के आधार पर 15 साल के किशोर को हिरासत में लिया गया है। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा।
डीसीपी ने कहा:
“यह बेहद संवेदनशील मामला है। आरोपी नाबालिग है, इसलिए कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई होगी। लेकिन किसी भी हालत में पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।”
समाज में गुस्सा और सवाल
इस वारदात ने लोगों को भीतर तक हिला दिया है। सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर है। कोई कह रहा है – “इतनी छोटी उम्र में कोई इतना हिंसक कैसे हो सकता है?”
तो कोई लिख रहा है – “बच्चों की परवरिश और उनके गुस्से पर ध्यान देना ज़रूरी है, वरना ऐसे हादसे बढ़ते जाएंगे।”
मनोवैज्ञानिकों की राय
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति कई बार नजरअंदाज कर दी जाती है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन या छोटी बातों पर मारपीट की आदतें हल्के में नहीं लेनी चाहिए। परिवार और समाज को ऐसे संकेतों को समय रहते पकड़ना होगा।
सबक और सवाल
यह घटना सिर्फ़ एक अपराध नहीं, बल्कि एक आईना है। क्या हम बच्चों की मानसिक सेहत को गंभीरता से लेते हैं? क्या हम उनके गुस्से, उनके अकेलेपन, उनके मन की उलझनों को सुनते हैं? अगर नहीं, तो हमें अब सतर्क हो जाना चाहिए। वरना ऐसे हादसे सिर्फ़ अखबारों की खबर नहीं रहेंगे, बल्कि हर मोहल्ले की सच्चाई बन सकते हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली के इस मोहल्ले ने एक चार साल के मासूम को खो दिया। एक मां की गोद उजड़ गई, एक पिता का सहारा छिन गया और एक मोहल्ला हमेशा के लिए दहशत और गम में डूब गया।15 साल का एक लड़का अब कानून के शिकंजे में है, लेकिन सवाल यह है कि कहीं हम सब मिलकर ऐसी परिस्थितियां तो नहीं बना रहे, जहां मासूमियत इतनी जल्दी हिंसा में बदल जाती है।

