- दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में शिक्षा के अधिकार (RTE) के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। माननीय मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने ‘जस्टिस फॉर ऑल’ संस्था द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों को कटघरे में खड़ा किया।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देश:
अदालत ने शिक्षा सचिव (दिल्ली सरकार), एमसीडी (MCD) कमिश्नर और एनडीएमसी (NDMC) के अध्यक्ष को आदेश दिया है कि वे संयुक्त रूप से अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी स्कूलों का भौतिक सर्वेक्षण (Physical Survey) करें। कोर्ट ने प्रशासन को 4 सप्ताह का समय देते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। इस रिपोर्ट में यह बताना अनिवार्य होगा कि कितने स्कूल RTE अधिनियम की धारा 19 और उसकी अनुसूची के तहत निर्धारित मानदंडों (जैसे क्लासरूम, टॉयलेट, पीने का पानी, और खेल का मैदान) का पालन कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता की दलील:
संस्था की ओर से पेश हुए अधिवक्ता खगेश बी. झा और अधिवक्ता शिखा शर्मा बग्गा ने कोर्ट को अवगत कराया कि कई सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचा कानून के अनुरूप नहीं है, जिससे छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई रिपोर्ट पेश होने के बाद होगी।
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