नई दिल्ली: दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए करीब 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से 25 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। इस घटना के बाद मृतक के परिजनों ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मृतक की पहचान कमल के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि अगर समय रहते पुलिस ने मदद की होती तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी। कमल के भाई करण का कहना है कि परिवार रात भर अलग-अलग थानों के चक्कर काटता रहा और लगातार फोन करता रहा, लेकिन पुलिस की ओर से यही जवाब मिला कि रात में तलाश संभव नहीं है और शिकायत सुबह दर्ज की जाएगी।
परिवार का दावा है कि घटना के समय कमल का मोबाइल फोन चालू था और उसकी लोकेशन के जरिए घटनास्थल तक पहुंचा जा सकता था। उनका कहना है कि जिस रास्ते पर गड्ढा था, वहां तुरंत तलाशी अभियान चलाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
ठेकेदार और जल बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ केस
जनकपुरी में हुई इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 के तहत ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। शिकायत में बताया गया है कि एक महिला कॉलर ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक बाइक सवार 15 फीट गहरे गड्ढे में गिर गया है।
पुलिस के अनुसार, मौके पर पहुंचने पर देखा गया कि बाइक नंबर DL9SCJ9478 (अपाचे) के साथ एक अज्ञात व्यक्ति सड़क के बीचों-बीच खोदे गए करीब 20 फीट लंबे, 13 फीट चौड़े और 14 फीट गहरे गड्ढे में गिरा हुआ था। घायल को फायर ब्रिगेड की मदद से बाहर निकालकर PCR वाहन से दीन दयाल उपाध्याय (DDU) अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटनास्थल पर कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं मिला।
FIR में क्या-क्या आरोप
FIR में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि मुख्य सड़क पर बनाए गए गड्ढे को न तो ढका गया था और न ही खुदाई के दौरान कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। वहां चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर या संकेतक नहीं लगाए गए थे और न ही पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था थी, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
FIR में यह भी उल्लेख किया गया है कि दिल्ली जल बोर्ड और उसके ठेकेदार को इस बात की पूरी जानकारी थी कि बिना सुरक्षा इंतजाम के सड़क पर गड्ढा छोड़ना जानलेवा साबित हो सकता है। इसके बावजूद न तो सुरक्षा के उपाय किए गए और न ही कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात किया गया।
पुलिस का कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अब तक इस घटना का कोई चश्मदीद गवाह सामने नहीं आ पाया है। मामले की जांच जारी है।

