दिल्ली की गलियों में रोज़मर्रा की छोटी-छोटी घटनाएँ भी कभी-कभी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं। ताज़ा मामला भी कुछ ऐसा ही है, जिसने हलचल मचा दी है। दरअसल, हिंदुस्तानी दवाखाने के बाहर अचानक एक नया बोर्ड लगा दिया गया, जिस पर लिखा था – “आयुष्मान आरोग्य मंदिर।”
बस फिर क्या था! आम आदमी पार्टी (AAP) के एक विधायक नाराज़ हो गए और सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिख दिया। उनका कहना है – “ये जनता की राय पूछे बिना कैसे हो सकता है? लोग सालों से इस दवाखाने को पुराने नाम से जानते हैं। अब अचानक बदलने का क्या मतलब है?”
कैसे भड़की नाराज़गी?
लोगों का ध्यान तब गया जब दवाखाने की दीवार पर चमचमाता नया बोर्ड दिखा। आसपास के लोगों ने तुरंत चर्चा शुरू कर दी – “ये कब लगा? क्यों लगा? क्या अब दवाखाना बदल गया है?”
यहीं से मामला गर्म हो गया। विधायक को जैसे ही खबर मिली, उन्होंने जांच करवाई और अपनी नाराज़गी जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में साफ लिखा –
नाम बदलने से जनता को कंफ्यूज़न हो रहा है।
बिना किसी आधिकारिक ऐलान या जनता की सहमति के ये कदम ग़लत है।
दिल्ली सरकार के अपने मॉडल पहले से मौजूद हैं, तो इस तरह के बदलाव की ज़रूरत ही क्यों?
राजनीति का तड़का
अब दिल्ली की राजनीति में जब कोई मुद्दा उठे तो उस पर बयानबाज़ी होना लाज़मी है। विपक्षी दलों ने कहा कि यह सिर्फ “ब्रांडिंग” का खेल है। सरकार अपनी योजनाओं का ठप्पा हर जगह लगाना चाहती है।
वहीं AAP विधायक का कहना है – “दिल्ली ने मोहल्ला क्लीनिक का मॉडल देशभर में मशहूर किया। ऐसे में किसी और नाम का बोर्ड लगाना लोगों को गुमराह करता है।”
जनता क्या कह रही है?
स्थानीय लोग भी इस बदलाव से हैरान हैं। एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने हंसते हुए कहा – “अरे भाई, हम तो बचपन से इसे हिंदुस्तानी दवाखाना कहते आए हैं। अब अचानक नया नाम सुनकर अजनबी सा लगता है।”
एक और व्यक्ति बोला – “देखो नाम चाहे जो हो, लेकिन इलाज अच्छा होना चाहिए। अगर दवा सही मिलेगी तो लोग वैसे ही आएंगे।”
यानि जनता की राय बंटी हुई है—कुछ लोग भावनात्मक रूप से पुराने नाम से जुड़े हैं, तो कुछ को नाम से ज्यादा इलाज की क्वालिटी मायने रखती है।

