दिल्ली, जिसे लोग देश का दिल कहते हैं, इन दिनों मुसीबत में डूबी हुई है। कहीं गलियां नालों में बदल गई हैं, तो कहीं सड़कें तालाब जैसी दिख रही हैं। सुबह घर से निकलने वाला हर शख्स एक ही सवाल पूछ रहा है – “पता नहीं आज रास्ते से निकल पाएंगे या नहीं।”
बारिश ने बिगाड़ा हाल
लगातार बरस रही बारिश ने दिल्ली की रफ्तार थाम दी है। सुबह-सुबह ऑफिस जाने वालों की गाड़ियां पानी में फंस जाती हैं। मेट्रो स्टेशन तक पैदल पहुंचने वाले लोग घुटनों तक पानी में भीगकर जाते हैं। स्कूल के बच्चे तो जैसे बारिश के बंधक बन गए हैं, कई इलाकों में अभिभावकों ने मजबूरी में छुट्टी कर दी।
यमुना का कहर
दिल्लीवालों की सबसे बड़ी टेंशन यमुना नदी है। बारिश का पानी लगातार यमुना में मिल रहा है और नदी खतरे के निशान को पार करने की तैयारी में है। नदी किनारे रहने वाले परिवार रातों-रात अपना सामान समेटकर सुरक्षित जगहों की ओर निकल रहे हैं। एक महिला ने कहा – “हमने तो सोचा भी नहीं था कि एक दिन अपना घर ऐसे छोड़ना पड़ेगा।”
आम आदमी की परेशानियां
जो लोग शहर के निचले हिस्सों में रहते हैं, उनकी ज़िंदगी सबसे कठिन हो गई है। घरों में पानी घुस चुका है, रसोई तक गीली हो गई है। लोग बोतलबंद पानी और दूध तक के लिए परेशान हैं। एक रिक्शा चालक ने रोते हुए बताया – “पैदल चलना मुश्किल है तो सवारी कहां से मिलेगी? पेट पालना भी मुसीबत हो गया है।”
प्रशासन की कोशिशें और जनता की नाराज़गी
सरकारी टीमें दिन-रात जुटी हुई हैं। पंप लगाकर पानी निकाला जा रहा है, ट्रैफिक पुलिस हर चौराहे पर तैनात है। लेकिन हकीकत ये है कि लोगों को ज़्यादा फर्क महसूस नहीं हो रहा। जगह-जगह गुस्से की आवाज़ सुनाई देती है – “हर साल यही होता है, लेकिन कोई स्थायी हल क्यों नहीं निकाला जाता?”
सोशल मीडिया बना गवाह
इंटरनेट पर दिल्ली की तस्वीरें वायरल हो रही हैं। कहीं बच्चे बारिश के पानी में मछली पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो कहीं गाड़ियां नाव की तरह तैरती नज़र आती हैं। एक फोटो में ऑटो आधा डूबा दिखा और किसी ने लिखा – “दिल्ली में नया वॉटर सफारी शुरू हो गया।”
बाज़ार पर मार
दिल्ली के बाजारों में भी सन्नाटा पसर गया है। सरोजिनी, करोल बाग़ और चांदनी चौक में दुकानदार शिकायत कर रहे हैं कि ग्राहकों की भीड़ गायब हो गई है। कई दुकानों में तो पानी भर जाने से माल भी खराब हो गया।
आगे क्या?
मौसम विभाग ने साफ़ चेतावनी दी है कि फिलहाल राहत की उम्मीद कम है। आने वाले दिनों में और बारिश हो सकती है। यानी दिल्ली वालों को कुछ और वक्त इस पानी-पानी हालात से जूझना पड़ेगा।
नतीजा
दिल्ली की ये तस्वीर किसी को भी सोचने पर मजबूर कर देती है। देश की राजधानी, जहां से पूरे भारत को दिशा मिलती है, वहां हर बारिश के साथ जिंदगी ठप हो जाती है। लोग थक चुके हैं, उनका सवाल साफ है – “क्या हमारी दिल्ली कभी बारिश में डूबने से बचेगी?”
जब तक प्रशासन कागज़ी योजनाओं से आगे बढ़कर असली काम नहीं करेगा, तब तक दिल्ली की गलियां हर साल यमुनानगर का रूप लेती रहेंगी।

