दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और इसके कारण निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है। राजधानी के कई इलाकों में पानी भर गया है। प्रशासन ने प्रभावित कॉलोनियों से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत कैंपों में पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। लोग अपने घरों का सामान, जरूरी दस्तावेज और बच्चों को साथ लेकर मजबूरी में सुरक्षित ठिकानों की ओर रवाना हो रहे हैं।
बढ़ते जलस्तर से खतरा
पिछले कई दिनों से जारी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी ने यमुना को खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा दिया है। बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में घुस रहा है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी दिल्ली, मजनू का टीला, आईटीओ और यमुना बाजार जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा है। यहां की गलियां पानी में डूब गई हैं और लोग नाव या ट्रैक्टर के सहारे अपना सामान निकाल रहे हैं।
प्रशासन की मुस्तैदी
दिल्ली प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया है। पुलिस और सिविल डिफेंस के कर्मचारी लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति पानी में फंसा न रह जाए। साथ ही, विभिन्न स्कूलों और सामुदायिक भवनों को अस्थायी राहत शिविरों में बदल दिया गया है। इन कैंपों में खाने-पीने का इंतजाम किया गया है। हालांकि, स्थानीय लोग शिकायत कर रहे हैं कि अभी भी पानी की बोतलें, दवाइयां और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।
हाहाकार मचाती तस्वीरें
बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकल रही तस्वीरें बेहद दर्दनाक हैं। छोटे-छोटे बच्चे कंधों पर बिठाकर निकाले जा रहे हैं, महिलाएं सिर पर सामान रखे हुए सुरक्षित जगहों की ओर बढ़ रही हैं। बुजुर्गों को हाथों में सहारा देकर ट्रैक्टर और बसों तक ले जाया जा रहा है। लोग अपने घरों में पल भर में फैले पानी से घबराए हुए हैं। जिनके पास पक्के मकान नहीं हैं, उनकी झोपड़ियां और अस्थायी घर पूरी तरह डूब गए हैं।
आर्थिक और सामाजिक असर
बाढ़ ने दिल्ली की सामान्य जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर दिया है। रोजमर्रा का कामकाज ठप हो गया है। बाजार बंद हैं और जिन इलाकों में दुकानें खुली भी हैं, वहां सामान पहुंचाने में दिक्कतें आ रही हैं। सब्जियों और दूध जैसी जरूरी चीजों के दाम अचानक बढ़ गए हैं। मजदूरी और छोटे-मोटे धंधों से जुड़ी बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ा है क्योंकि स्कूल बंद करने पड़े हैं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
मौसम विभाग और विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों तक हालात और खराब हो सकते हैं, क्योंकि पहाड़ों में भारी बारिश जारी है। यमुना का जलस्तर और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर पानी की निकासी और बाढ़ नियंत्रण के स्थायी इंतजाम नहीं किए गए तो हर साल दिल्ली इसी तरह के संकट से जूझती रहेगी।
लोगों की उम्मीदें
मुश्किल हालात के बीच भी लोगों को सरकार और प्रशासन से मदद की उम्मीद है। कई जगह पर समाजसेवी संगठन और स्थानीय निवासी मिलकर राहत सामग्री बांट रहे हैं। वहीं, प्रभावित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जब पानी उतर जाएगा तो वे फिर से अपने घर कैसे बसाएंगे, क्योंकि बाढ़ ने उनकी जमा-पूंजी और सामान को बहा दिया है।

