Monday, February 16, 2026
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Delhi Blast | शाही इमाम बुखारी बोले­ “ये वार सिर्फ दिल्ली पर नहीं, भारत की रीढ़ पर है।”

– दिल्ली दर्पण ब्यूरो

दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके के बाद पूरे देश में चिंता, आक्रोश और सवालों का माहौल है। इस बीच शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी ने अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। उनका बयान साफ, सीधा और किसी भी तरह की गोलमोल भाषा से दूर है, यह हमला देश की एकता पर सीधा प्रहार है।

शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी

उनका कहना है कि यह घटना किसी संयोग का नतीजा नहीं, बल्कि सोची–समझी कोशिश है। कोशिश, जो देश के भीतर डर, भ्रम और समुदायों के बीच दूरी पैदा करना चाहती है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को “घृणित साजिश” बताया और कहा कि समाज के हर वर्ग को इसे मिलकर नाकाम करना होगा। बुखारी ने बिना किसी घुमावदार लाइन के यह बात रखी, “देश के नागरिक चाहे किसी भी धर्म के हों, ऐसी हिंसा के खिलाफ खड़े होना उनका कर्तव्य है।”

मुसलमानों की स्थिति पर साफ संदेश

उन्होंने एक और महत्वपूर्ण बात कही, भारतीय मुसलमान किसी दोराहे पर खड़े लोग नहीं हैं। वे वही हैं जो कश्मीरियों, सिखों और बाकी समुदायों की तरह आतंकवाद के खिलाफ खड़े हैं।

उनका कहना था कि ऐसी घटनाएँ किसी भी धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। अपराधियों का धर्म नहीं होता, और निर्दोषों को मारना किसी भी धार्मिक सिद्धांत में स्वीकार्य नहीं है।

बुखारी का यह स्पष्ट बयान कई तथाकथित “नैरेटिव्स” पर जोरदार चोट है, जो ऐसे समय में हवा में तैरने लगते हैं और माहौल को और जहरीला करते हैं।

डर फैलाने की कोशिश, लेकिन देश तैयार

शाही इमाम का कहना है कि धमाके का असल मकसद डर का माहौल बनाना है। लेकिन देश अब 90 के दशक का भारत नहीं है। अशांति फैलाने वालों की कोशिशें कभी–कभार झटका दे सकती हैं, मगर देश को पटरी से उतारने की ताकत इनके पास नहीं। उनका कहना है कि देश की सुरक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है—अमन बनाए रखना हर व्यक्ति का काम है।

सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग

बुखारी ने प्रधानमंत्री से इस हमले की “पूरी और पारदर्शी जांच” की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ कार्रवाई की घोषणा काफी नहीं; लोगों को न्याय दिखाई भी देना चाहिए। उन्होंने यह बात जोर देकर कही कि साजिशकर्ताओं को ऐसी सज़ा मिलनी चाहिए जो दूसरों के लिए भी चेतावनी बन सके।

धर्म का नाम लेकर हिंसा सीधी निंदा

सबसे महत्वपूर्ण बात उन्होंने दो टूक कहा कि Islam किसी भी हालत में निर्दोषों की हत्या को सही नहीं ठहराता। उनके शब्द थे, “निर्दोष की जान लेना सबसे बड़ा अपराध है। इस्लाम में इसकी कोई अनुमति नहीं है।”

अंत में एक सख्त लेकिन जरूरी संदेश

बुखारी ने अंत में कहा कि देश की शांति, सौहार्द और एकता ही सबसे बड़ी ताकत है। आतंकवादी ताकतें तभी जीतती हैं जब लोग बिखर जाएँ। उनका संदेश सरल है “एकजुट रहो, शांत रहो, और इन ताकतों को कभी कामयाब मत होने दो।” यह बयान सिर्फ प्रतिक्रिया नहीं—यह एक चेतावनी है, और एक जिम्मेदारी की याद दिलाता है।

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