– दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली | विशेष संवाददाता अक्सर थानों में सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद पुलिस का अमानवीय व्यवहार और बदतमीजी की खबरें चारदीवारी से बाहर नहीं आ पातीं। लेकिन सागरपुर थाने की एक रेप पीड़िता ने वह बहादुरी दिखाई जिसकी कल्पना शायद वहां तैनात अफसरों ने भी नहीं की होगी। महिला ने पुलिस के अहंकार और वकीलों के प्रति उनकी नफरत को अपने फोन में गुप्त रूप से रिकॉर्ड कर लिया। अगर यह वीडियो रिकॉर्ड नहीं होता, तो शायद दिल्ली पुलिस की यह ‘गुंडागर्दी’ और न्याय व्यवस्था के प्रति उनका शर्मनाक रवैया कभी दुनिया के सामने नहीं आ पाता।
SHO राज कुमार और महिला पुलिसकर्मियों की बदजुबानी
वायरल वीडियो में सागरपुर थाना अध्यक्ष SHO राज कुमार, WSI अंजू और WSI सुषमा का बेहद आपत्तिजनक और असंवैधानिक चेहरा सामने आया है। एक रेप पीड़ित महिला, जो न्याय की आस में थाने पहुंची थी, उसके सामने ये अधिकारी वकीलों की छवि खराब करते और उन्हें अपमानित करते दिखे।
वीडियो में पुलिस अधिकारियों ने वकीलों के लिए “भूखा-नंगा” और “पैसे का भूखा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। महिला अधिकारियों ने पीड़िता को वकील न करने की हिदायत देते हुए कहा— “वकील गलत सलाह देते हैं, ये चार दिन के मेहमान होते हैं, इनके चक्कर में मत पड़ो।” हद तो तब हो गई जब सरेआम धमकी दी गई कि “तेरा वकील भी पिटेगा।”
न्याय के रास्ते में रोड़ा बने थानेदार
वीडियो में SHO राज कुमार का रवैया भी उतना ही तानाशाही पूर्ण दिखा। उन्होंने न केवल पीड़िता से बदतमीजी की, बल्कि कानूनी अधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए स्पष्ट आदेश दिया कि “वकीलों को थाने के अंदर नहीं घुसने दिया जाए।” एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ’ और ‘पीड़ित को न्याय’ की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ सागरपुर थाने के ये जिम्मेदार अफसर एक रेप पीड़िता को कानूनी सहायता (Legal Aid) लेने से रोककर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
वकीलों का आक्रोश: तत्काल निलंबन की मांग
जैसे ही यह वीडियो लीक हुआ, कानूनी गलियारों में हड़कंप मच गया। वकीलों ने इसे पूरी बिरादरी का अपमान बताते हुए सागरपुर थाने का घेराव किया। वकीलों का कहना है कि जो पुलिसकर्मी एक पीड़िता के सामने कानून के रक्षकों को “पीटने” और “थाने से भगाने” की बात करते हैं, वे वर्दी पहनने के लायक नहीं हैं।
पीड़ित महिला और वकीलों ने दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों से मांग की है कि SHO राज कुमार, WSI अंजू और WSI सुषमा पर तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और उन्हें सेवा से निलंबित किया जाए।
गंभीर सवाल: रक्षक या भक्षक?
यह घटना दिल्ली पुलिस की ‘मित्र पुलिस’ वाली छवि पर एक गहरा दाग है। जब थाने के मुखिया और महिला अधिकारी ही पीड़िता को डराने लगें और वकीलों को सरेआम गाली दें, तो आम आदमी न्याय के लिए कहाँ जाएगा? इस गुप्त रिकॉर्डिंग ने साबित कर दिया है कि खाकी के भीतर कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।

