Tuesday, March 3, 2026
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सांसों के संकट पर लोक संसद, देवेन्द्र यादव ने बताया प्रदूषण से निपटने का रास्ता

  • दिल्ली दर्पण ब्यूरो
    दिल्ली की बिगड़ती हवा और बढ़ते प्रदूषण पर गंभीर चर्चा के उद्देश्य से दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र यादव के नेतृत्व में रविवार को “लोक संसद – संवाद से समाधान” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जनपथ स्थित वेस्टर्न कोर्ट सभागार में आयोजित इस लोक संसद में पर्यावरणविदों, डॉक्टरों, शिक्षकों, आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों, छात्रों, अधिवक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न वर्गों के लोगों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार ने संसद में प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर विपक्ष को चर्चा का अवसर नहीं दिया और दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी प्रदूषण को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाने से परहेज किया। इसी कारण कांग्रेस ने समाज के जागरूक वर्गों के साथ मिलकर लोक संसद का आयोजन किया, ताकि प्रदूषण पर संवाद के जरिए समाधान तलाशा जा सके।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि लोक संसद में हुई चर्चा के आधार पर दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर एक विस्तृत सुझाव पत्र तैयार किया जाएगा, जिसे सरकार और समाज के विभिन्न वर्गों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आम नागरिकों से भी प्रदूषण को लेकर सुझाव मांगे गए हैं।

लोक संसद में पर्यावरणविद विमलेन्दु झा और डॉ. जितेन्द्र नागर ने दिल्ली में प्रदूषण के दुष्प्रभावों और नियंत्रण के उपायों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समन्वय एडवोकेट सुनील कुमार ने किया।

श्री देवेन्द्र यादव ने कहा कि दिल्ली में खतरनाक स्तर तक पहुंच चुके वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहन प्रदूषण है। उन्होंने आईआईटी द्वारा विकसित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि शीतकाल में दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण का 51 से 53 प्रतिशत हिस्सा वाहनों से आता है। वर्ष 2025 में स्थानीय प्रदूषण का अनुपात बढ़कर लगभग 35 प्रतिशत हो गया है, जबकि एनसीआर से आने वाले प्रदूषण का योगदान घटा है। इससे स्पष्ट है कि दिल्ली का प्रदूषण अब मुख्य रूप से स्थानीय और परिवहन-जनित है।

उन्होंने दिल्ली में सभी सार्वजनिक परिवहन को निःशुल्क या किफायती करने का सुझाव देते हुए कहा कि लक्ज़मबर्ग, वाशिंगटन जैसे देशों के अनुभव बताते हैं कि इससे निजी वाहनों की संख्या घटती है, ईंधन की खपत कम होती है और उत्सर्जन में कमी आती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में, जहां प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और सामाजिक असमानता आपस में जुड़ी हुई हैं, निःशुल्क या सस्ता सार्वजनिक परिवहन कोई साधारण कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि जन-स्वास्थ्य और जलवायु संरक्षण की अनिवार्य आवश्यकता है।

लोक संसद में मौजूद प्रतिभागियों ने प्रदूषण सहित दिल्ली की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर भी अपनी चिंताएं व्यक्त कीं और समाधान के सुझाव दिए। श्री यादव ने कहा कि प्रदूषण से निपटना केवल सरकार की नहीं, बल्कि हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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