दिल्ली दर्पण ब्यूरो
नई दिल्ली | सावन पार्क वार्ड (वज़ीरपुर): राजधानी के वज़ीरपुर जेजे कॉलोनी (जी-ब्लॉक) में उस वक्त भारी तनाव फैल गया जब नगर निगम (MCD) के दस्ते ने तमिल समाज द्वारा धार्मिक आयोजन के लिए बनाए गए हवनकुंड को ज़मींदोज़ कर दिया। यह कार्रवाई सुबह 5 बजे की गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी रोष है। मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब इसमें तीखी सियासत भी जुड़ गई है।
सत्ता की हनक या ‘न्योता’ न मिलने का गुस्सा?
क्षेत्र में चर्चा है कि इस धार्मिक आयोजन में भारतीय जनता पार्टी की विधायक पूनम भारद्वाज को तो आमंत्रित किया गया था, लेकिन आम आदमी पार्टी की स्थानीय निगम पार्षद चित्रा विद्यार्थी को बुलावा नहीं मिला। आरोप लग रहे हैं कि इसी ‘अनदेखी’ का बदला लेने के लिए एमसीडी के जरिए यह कार्रवाई करवाई गई। हालांकि, पार्षद चित्रा विद्यार्थी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने केवल पार्कों की बदहाली की जांच के निर्देश दिए थे, हवनकुंड तोड़ने का कोई आदेश नहीं दिया।

सवालों के घेरे में MCD: ‘ऊपर’ का आदेश किसका था?
मौके पर मौजूद एमसीडी अधिकारियों की स्थिति बेहद हास्यास्पद और संदिग्ध नज़र आई। जब विधायक और जनता ने उनसे पूछा कि यह कार्रवाई किसके लिखित या मौखिक आदेश पर हुई, तो अधिकारी बगलें झांकने लगे। अधिकारियों का तर्क था कि पार्क में बिना अनुमति आयोजन ‘अवैध’ है, लेकिन उनके पास इस सवाल का जवाब नहीं था कि:
- अगर यह अवैध है, तो पूरी जेजे कॉलोनी में होने वाले अन्य आयोजनों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
- पार्कों की बदहाली, वहां होने वाले जुए और शराबियों के जमावड़े पर प्रशासन की आंखें क्यों बंद हैं?
- आखिर ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि सुबह 5 बजे ही बुलडोजर चलाना पड़ा?
बीजेपी ने घेरा, पार्षद की सफाई बेअसर
बीजेपी नेता अशोक भारद्वाज ने निगम प्रशासन और पार्षद को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि क्षेत्र के पार्कों में न पौधे लगते हैं, न सफाई होती है, बस वहां असामाजिक तत्वों का डेरा रहता है। उन्होंने सीधा सवाल किया कि क्या एमसीडी अब केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने का जरिया बन गई है?
दूसरी ओर, पार्षद चित्रा विद्यार्थी लाख सफाई देती रहीं कि यह आदेश उनका नहीं है, लेकिन तमिल समाज के लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं। उनका तर्क है कि जब एमसीडी पार्षद के अधीन आती है, तो बिना उनकी जानकारी के अधिकारी इतनी बड़ी हिम्मत कैसे कर सकते हैं?
धार्मिक भावनाओं और राजनीति का संगम
इस हंगामे ने वज़ीरपुर की फिजां में तनाव घोल दिया है। एक तरफ जहां भारी नारेबाजी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ एमसीडी अधिकारी केवल इतना कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि “मैं क्या कहूं?” यह “मौन” खुद में कई राज़ छुपाए हुए है।
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