नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने रूस और तुर्की में आकर्षक नौकरियों का झांसा देकर लोगों से लाखों रुपये और असली पासपोर्ट ऐंठने वाले गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई को क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर संजय कौशिक की अगुवाई में अंजाम दिया गया।
कैसे बनाते थे शिकार? (Modus Operandi)
यह गिरोह अत्यंत शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस की जांच में सामने आए तरीके कुछ इस प्रकार हैं:
- सोशल मीडिया का जाल: आरोपी फेसबुक और व्हाट्सएप के माध्यम से विदेश में नौकरी के लुभावने विज्ञापन पोस्ट करते थे।
- पासपोर्ट और दस्तावेज़: संपर्क करने पर, पीड़ितों से कोरियर के जरिए असली पासपोर्ट मंगवा लिया जाता था।
- फर्जीवाड़ा: पासपोर्ट मिलते ही उसे स्कैन कर उस पर रूस, तुर्की और अजरबैजान के फर्जी वीजा स्टैंप लगा दिए जाते थे।
- भरोसा जीतना: पीड़ितों को फर्जी एयर टिकट और नकली ऑनलाइन वेरिफिकेशन लिंक भेजे जाते थे, ताकि उन्हें यकीन हो जाए कि उनका वीजा लग चुका है।
- ठगी और गायब: जैसे ही पीड़ित रकम जमा कराते, आरोपी अपने मोबाइल फोन बंद कर गायब हो जाते थे। पीड़ितों को ठगी का पता तब चलता था, जब वे टिकट और वीजा को चेक करते थे।
क्या कुछ हुआ बरामद?
एसीपी अशोक शर्मा की निगरानी में गठित टीम ने पीतमपुरा के पास जाल बिछाकर इन तीनों आरोपियों को दबोचा। पुलिस ने इनके पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया है:
- 5 असली भारतीय पासपोर्ट: जो पीड़ितों से ठगे गए थे।
- 7 मोबाइल फोन: जिनमें फर्जी वीजा, जॉब लेटर और हवाई टिकटों के स्क्रीनशॉट मौजूद थे।
- नकदी और डेबिट कार्ड: छापेमारी में नकद राशि, अलग-अलग नामों से जारी 9 डेबिट व प्रीपेड कार्ड बरामद किए गए हैं।
- फर्जी पहचान पत्र: आरोपियों के पास से फर्जी नाम से तैयार किए गए पहचान पत्र भी मिले हैं।
आरोपियों की प्रोफाइल
पकड़े गए तीनों आरोपी अलग-अलग भूमिकाओं में सक्रिय थे:
- सलाउद्दीन मंसूरी (उर्फ हैदर खान): यह गिरोह का मास्टरमाइंड था जो खुद को कोलकाता की फर्जी कंपनी ‘सबा एंटरप्राइजेज’ का HR मैनेजर बताता था। 40% कमीशन पर काम करने वाला सलाउद्दीन, नोएडा में पहले एक्सपोर्ट कंपनियों में काम कर चुका है।
- कौशर: यह गिरोह का ‘क्लाइंट हंटर’ था। इसका काम बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से विदेश जाने के इच्छुक लोगों को ढूंढना था। यह फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को फंसाता था।
- मोहम्मद शहजाद: यह एजेंट के तौर पर ग्राहकों को लाता था। इसका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और 2020 में भी एक मामले में जेल जा चुका है। इसे मास्टरमाइंड मुन्ना ने पैसे लेने के बाद मोबाइल बंद करने की ट्रेनिंग दी थी।
मास्टरमाइंड की तलाश जारी
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, इस पूरे गिरोह का सरगना मोहम्मद मुन्ना है, जो फिलहाल फरार है। क्राइम ब्रांच अब मुन्ना की तलाश कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क ने अब तक कुल कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
यह भी पढ़ें:– https://delhidarpantv.com/delhi-shalimar-bagh-murder-case-husband-kills-tenant-surrenders/

