नई दिल्ली | – दिल्ली दर्पण ब्यूरो
वजीरपुर जेजे कॉलोनी के के-ब्लॉक में मामूली सी बात पर एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, लेकिन इस घटना ने दिल्ली के प्रशासनिक ढांचे और जनप्रतिनिधियों के दोहरे चरित्र को नंगा कर दिया है। जहाँ एक ओर पीड़ित परिवार इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निगम पार्षद और क्षेत्रीय विधायक की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अपराध में भी ‘वीआईपी’ कल्चर?
पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि जब उत्तम नगर जैसे इलाकों में ऐसी वारदातें होती हैं, तो पूरी दिल्ली की सियासत वहां उमड़ पड़ती है। लेकिन वजीरपुर की गलियों में जब एक गरीब का घर उजड़ता है, तो रेखा गुप्ता और पूनम भारद्वाज जैसे नेताओं को रास्ता तक याद नहीं रहता। क्या इन नेताओं के लिए संवेदनाएं भी इलाके की प्रोफाइल देखकर जागती हैं? मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, पर सांत्वना देने के लिए किसी ‘माननीय’ के पास समय नहीं है।
पुलिस की संवेदनहीनता और खौफ का साया
दिल्ली दर्पण टीवी के कार्यालय पहुंची दर्जनों महिलाओं ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि:
- थाने में उपहास: जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने गया, तो कथित तौर पर पुलिसकर्मियों और एसएचओ ने उनकी बातों को हंसी में उड़ा दिया।
- अधूरी कार्रवाई: आरोप 15-20 लोगों पर है, लेकिन पुलिस ने मात्र 4 लोगों को पकड़कर खानापूर्ति कर दी है। बाकी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को धमका रहे हैं।
- डर का माहौल: हत्यारों की मां खुलेआम अस्पताल में आकर पैसे के दम पर केस रफा-दफा करने की धमकी दे रही है। जेजे कॉलोनी की महिलाएं पूछ रही हैं— “क्या हम अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं?”
एमसीडी और स्थानीय निकाय के गाल पर तमाचा
स्थानीय लोगों का आक्रोश नगर निगम और क्षेत्रीय विधायक के खिलाफ चरम पर है। जेजे कॉलोनियों में बढ़ती गुंडागर्दी और असुरक्षा के माहौल ने एमसीडी के ‘सुरक्षित दिल्ली’ के दावों की पोल खोल दी है। आखिर क्यों इन इलाकों में पुलिस गश्त और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं? क्या प्रशासन सिर्फ टैक्स वसूलने और रैलियों के लिए है?
“मेरे पति को मार दिया, अब मुझे अपने बच्चों की जान का डर है। पुलिस कहती है हम कुछ नहीं कर सकते। अगर सरकार हमें सुरक्षा नहीं दे सकती, तो उन हत्यारों को जनता के हवाले कर दे।” — दीक्षा (पीड़ित की पत्नी)
वजीरपुर की ये चीखें अब सत्ता के गलियारों तक पहुंचनी चाहिए। इंसाफ में देरी, अन्याय के बराबर है।

