नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को उच्च सदन में ‘डिप्टी लीडर’ के पद से हटा दिया गया है। पार्टी ने उनकी जगह अब अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी है। केवल पद ही नहीं, पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यहाँ तक कह दिया है कि राघव चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय भी आवंटित न किया जाए। इस कड़े एक्शन के बाद सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि क्या राघव और पार्टी के बीच दूरियां अब खत्म होने की कगार पर हैं?
एक्शन के पीछे की 3 मुख्य वजहें
सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में राघव चड्ढा के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के पीछे तीन बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
- पार्टी के संकट काल में ‘चुप्पी’: जब दिल्ली आबकारी नीति मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं को जमानत मिली, तब राघव चड्ढा की ओर से कोई खास सक्रियता या बयानबाजी नहीं देखी गई। पार्टी के संकट और फिर राहत के समय उनकी यह ‘खामोशी’ शीर्ष नेतृत्व को रास नहीं आई।
- बोलने के समय पर एकाधिकार: दावा किया जा रहा है कि राघव चड्ढा राज्यसभा में पार्टी के कोटे का अधिकांश समय खुद ले लेते थे। इस वजह से आम आदमी पार्टी के अन्य सांसदों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाता था, जिससे सांसदों के बीच असंतोष बढ़ रहा था।
- संगठनात्मक कार्यों से दूरी: यह भी चर्चा है कि बीते कुछ समय से राघव चड्ढा पार्टी के सांगठनिक कामों और महत्वपूर्ण बैठकों में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे। उनकी अनुपस्थिति और उदासीनता को अनुशासनहीनता के तौर पर देखा जा रहा है।
संजय सिंह का बयान और बदलती हवा
हाल ही में जब सांसद संजय सिंह से राघव चड्ढा के किसी अन्य दल में शामिल होने की अटकलों पर सवाल किया गया था, तो उन्होंने दो-टूक कहा था, “यह आप उनसे पूछिए, लेकिन अगर वह ऐसा करते हैं तो उनके खिलाफ खड़ा होने वाला पहला आदमी मैं रहूंगा।“ हालांकि उन्होंने तब इन अटकलों को खारिज किया था, लेकिन पार्टी के ताजा एक्शन ने आग में घी डालने का काम किया है।
अब क्या होगा राघव चड्ढा का अगला कदम?
राघव चड्ढा, जो कभी अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे और दिल्ली के राजिंदर नगर से विधायक रहने के बाद 2022 में पंजाब कोटे से राज्यसभा भेजे गए थे, अब हाशिए पर नजर आ रहे हैं। राज्यसभा सचिवालय को भेजा गया पत्र उनके संसदीय करियर के लिए बड़ा झटका है। सवाल यह है कि क्या राघव चड्ढा पार्टी में अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश करेंगे या किसी नई राह की तलाश करेंगे?

