UMAK सेंटर फॉर कल्चर द्वारा आयोजित समारोह में अध्यात्म, भारतीय शास्त्रीय संगीत और रंगमंच का अनूठा संगम
नई दिल्ली,
प्रख्यात आध्यात्मिक संत एवं आनंद योग के प्रवर्तक श्री सुरेश भैया जी ने सुप्रसिद्ध सितार वादक पद्म भूषण पंडित देबू चौधुरी की 91वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय भव्य सांस्कृतिक समारोह के दूसरे दिन अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।
उस्ताद मुश्ताक अली ख़ान (UMAK) सेंटर फॉर कल्चर द्वारा आयोजित यह समारोह नई दिल्ली स्थित ऑडिटोरियम, त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस में संपन्न हुआ। समारोह में भारतीय शास्त्रीय संगीत, अध्यात्म और रंगमंच को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया गया। श्री सुरेश भैया जी की उपस्थिति ने इस सांस्कृतिक आयोजन को आत्मिक चेतना, ध्यान, मानसिक संतुलन और तनावमुक्त जीवन के संदेश से जोड़ते हुए और अधिक सार्थक बना दिया।
समारोह के दूसरे दिन आध्यात्मिक संत एवं आनंद योग के प्रवर्तक श्री सुरेश भैया जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशिष्ट आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया। इस अवसर पर श्री अजय चौधरी, आईपीएस, विशेष पुलिस आयुक्त (विजिलेंस एवं SPUWAC) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि प्रो. (डॉ.) पुनीत गुप्ता विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
“आनंद योग” के माध्यम से आंतरिक संतुलन और समग्र जीवन का संदेश

नई दिल्ली में UMAK सेंटर फॉर कल्चर द्वारा आयोजित सांस्कृतिक समारोह में आध्यात्मिक संत एवं आनंद योग के प्रवर्तक श्री सुरेश भैया जी और विशेष पुलिस आयुक्त (विजिलेंस एवं SPUWAC) श्री अजय चौधरी, आईपीएस, प्रख्यात रंगकर्मी श्रीमती हेमा सिंह को “पंडित देबू चौधुरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड 2026” प्रदान करते हुए।
समारोह का एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय क्षण वह रहा, जब श्री सुरेश भैया जी ने अपनी पुस्तक “आनंद योग” की प्रतियाँ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को भेंट कीं।
आध्यात्मिक संत के रूप में श्री सुरेश भैया जी वर्षों से मानव जीवन में आंतरिक शांति, आत्मबोध, ध्यान और सहज आनंद की महत्ता का संदेश देते रहे हैं। उनके द्वारा प्रवर्तित “आनंद योग” केवल साधना की एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आज के तनावपूर्ण जीवन में मानसिक संतुलन, आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मिक प्रसन्नता की ओर अग्रसर होने का मार्ग प्रस्तुत करता है।
भारतीय संगीत और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस समारोह में श्री सुरेश भैया जी की उपस्थिति ने कला और अध्यात्म के गहरे संबंध को सुंदर रूप में सामने रखा। उनका संदेश इस बात को रेखांकित करता है कि संगीत, साधना और संस्कृति मनुष्य को भीतर से परिष्कृत करने तथा जीवन में शांति और संतुलन स्थापित करने के सशक्त माध्यम हैं।
आज के समय में, जब जीवन तनाव, मानसिक असंतुलन और भावनात्मक दूरी से निरंतर प्रभावित हो रहा है, आनंद योग का संदेश मनुष्य को अपने भीतर लौटने, स्वयं से जुड़ने और अधिक संतुलित, शांत तथा आनंदपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता है। श्री सुरेश भैया जी की सहभागिता ने इस आयोजन को केवल कलात्मक प्रस्तुतियों तक सीमित न रखते हुए उसे आत्मचिंतन और आध्यात्मिक संवाद का विशेष अवसर भी बना दिया।
पंडित देबू चौधुरी को संगीतमय श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का आरंभ पद्म भूषण पंडित देबू चौधुरी के शिष्यों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सितार एन्सेम्बल से हुआ। श्री सुदीप राय, श्री सप्तऋषि मंडल और श्री अधिराज चौधुरी ने अपने पूज्य गुरु को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की। तबले पर उनका साथ श्री उरूज हसन ने दिया।
इस प्रस्तुति ने पंडित देबू चौधुरी की समृद्ध सांगीतिक विरासत, उनकी गुरु-परंपरा और भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रति उनके अमूल्य योगदान को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से स्मरण किया।
समारोह के दौरान पंडित देबू चौधुरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2026 सुप्रसिद्ध कलाकार श्रीमती हेमा सिंह को संगीत एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया। उपस्थित गणमान्य अतिथियों ने भारतीय कला और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में उनके आजीवन योगदान की प्रशंसा की।
रंगमंचीय प्रस्तुति: “Those Days”
समारोह का समापन हिन्दी नाटक “Those Days” के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। इस नाटक के लेखक एवं निर्देशक श्री राहुल दक्ष हैं। नाटक ने स्मृतियों, रिश्तों, भावनात्मक मौन और बदलते समय के प्रभावों को अत्यंत संवेदनशीलता तथा कलात्मक गहराई के साथ मंच पर प्रस्तुत किया।
मुख्य कलाकारों कुमकुम जैन और निखिल दीवान ने अपने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उनके सहज, भावपूर्ण और संवेदनशील अभिनय ने पात्रों के भीतर के संघर्ष, प्रेम और अकेलेपन को जीवंत कर दिया, जिसकी दर्शकों द्वारा विशेष सराहना की गई।
नाटक की पटकथा को भी दर्शकों और रंगमंच प्रेमियों से व्यापक प्रशंसा मिली। श्री राहुल दक्ष द्वारा लिखित इस प्रस्तुति में स्मृति, रिश्ते, बीते समय की कसक और बदलते जीवन-सत्यों को सूक्ष्मता से अभिव्यक्त किया गया। संवेदनशीलता, आत्ममंथन और सहज मानवीय भावनाओं का सुंदर संतुलन इस प्रस्तुति की सबसे बड़ी शक्ति बनकर सामने आया।
नाटक के संगीत पक्ष को कर्ण कुमार शर्मा ने साकार किया, जबकि विभा जैन द्वारा लिखे गए गीतों ने प्रस्तुति को अतिरिक्त भावनात्मक गहराई प्रदान की। सुरेंद्र सागर ने प्रकाश संयोजन एवं रचनात्मक सहयोग के माध्यम से नाटक के विभिन्न भावनात्मक स्तरों को प्रभावशाली ढंग से उभारा। मंच के पीछे प्रशांत, अभिषेक, कृष्णा, राजुल और अशर खान की टीम ने प्रस्तुति के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अध्यात्म और संस्कृति का अर्थपूर्ण संगम
दो दिवसीय यह सांस्कृतिक समारोह भारतीय शास्त्रीय संगीत, रंगमंच और आध्यात्मिक चिंतन का एक स्मरणीय संगम सिद्ध हुआ। आध्यात्मिक संत एवं आनंद योग के प्रवर्तक श्री सुरेश भैया जी की गरिमामयी उपस्थिति तथा उनकी पुस्तक “आनंद योग” के प्रस्तुतीकरण ने समारोह को एक विशिष्ट आध्यात्मिक केंद्र प्रदान किया।
उनकी सहभागिता ने यह संदेश सशक्त रूप से सामने रखा कि भारतीय संस्कृति केवल मनोरंजन अथवा कलात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि आत्मिक उन्नति, मानसिक संतुलन, सामूहिक सद्भाव और आंतरिक आनंद की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
पूरे समारोह का सुंदर एवं प्रभावशाली संचालन प्रसिद्ध दूरदर्शन प्रस्तोता तथा सांस्कृतिक मंच संचालिका साधना श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उनकी प्रभावपूर्ण भाषा, गरिमामयी प्रस्तुति और कलाओं की गहरी समझ ने समारोह के विविध कार्यक्रमों को एक सुगठित एवं यादगार सांस्कृतिक यात्रा में परिवर्तित कर दिया।
समापन अवसर पर श्रीमती रूना चौधुरी, सचिव, UMAK सेंटर फॉर कल्चर ने आध्यात्मिक संत श्री सुरेश भैया जी, मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, कलाकारों, विद्यार्थियों, सहयोगियों, मीडिया प्रतिनिधियों और उपस्थित दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह समारोह केवल एक स्मृति आयोजन नहीं, बल्कि साझा सांस्कृतिक मूल्यों, कलात्मक उत्कृष्टता और भारत की समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प का उत्सव है।
इस प्रकार, पद्म भूषण पंडित देबू चौधुरी की सांगीतिक विरासत को समर्पित यह समारोह श्री सुरेश भैया जी द्वारा प्रवर्तित “आनंद योग” के माध्यम से आंतरिक शांति, आध्यात्मिक चेतना और समग्र जीवन के संदेश के साथ अत्यंत सार्थक एवं स्मरणीय रूप में संपन्न हुआ।

