- राजेंद्र स्वामी , दिल्ली दर्पण
नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली की नवनियुक्त डीसीपी आकांक्षा यादव ने कार्यभार संभालते ही क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, अतिक्रमण और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हालांकि, इस बैठक के स्वरूप और इसमें शामिल चेहरों को लेकर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। चर्चा है कि जनसमस्याओं के समाधान के नाम पर बुलाई गई यह बैठक कहीं महज एक राजनीतिक परिचय सत्र बनकर तो नहीं रह गई?

बैठक में सांसद, विधायक और निगम पार्षदों के साथ-साथ भाजपा के जिला स्तर के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। हैरान करने वाली बात यह रही कि आम आदमी पार्टी (AAP) के जनप्रतिनिधियों को इस चर्चा से पूरी तरह दूर रखा गया। सवाल यह उठ रहा है कि यदि बैठक केवल ‘जनप्रतिनिधियों’ के साथ क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा के लिए ही थी, तो इसमें एक विशेष राजनीतिक दल के जिला पदाधिकारियों का क्या काम था? और क्या दिल्ली की प्रमुख विपक्षी पार्टी के पार्षदों को शामिल न करना महज एक संयोग था या सोची-समझी रणनीति? नार्थ वेस्ट जिले में आम आदमी पार्टी के तीन निगम पार्षद है , ये सब ऐसे इलाकों के है जहाँ पुलिस को विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए , लेकिन ध्यान देना तो दूर उन्हें पूरी तरह नजर अंदाज ही किया जा रहा है .
इस बैठक के बाद गलियारों में यह चर्चा तेज है कि दिल्ली पुलिस किसके प्रभाव में काम कर रही है। हालांकि संभव है कि पुलिस इस बैठक को राजनीतिक अखाड़ा बनने से बचाना चाहती हो, लेकिन एकतरफा भागीदारी ने इस धारणा को बल दिया है कि यह बैठक समस्याओं के समाधान से ज्यादा ‘सियासी जान-पहचान’ बढ़ाने का जरिया थी।
एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि थानों में अक्सर राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल कर दबाव बनाया जाता है। याद रहे कि यह वही जिला है जहाँ कुछ समय पहले एक इंस्पेक्टर का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें राजनीतिक दबाव और अपराधियों की सिफारिशों का जिक्र था। ऐसे में इस तरह की चुनिंदा भागीदारी वाली बैठकें पुलिस की निष्पक्ष कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
जनता की उम्मीदें और सुझाव :-
डीसीपी आकांक्षा यादव की काबिलियत और उनके पेशेवर अंदाज की जनता में सराहना हो रही है। लोगों को उनसे काफी उम्मीदें हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि ‘दिल की पुलिस’ बनने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने होंगे:
- सर्वदलीय संवाद: केवल एक पक्ष नहीं, बल्कि सभी दलों के जनप्रतिनिधियों के सुझाव लिए जाएं।
- कम्युनिटी पुलिसिंग: पुलिस को क्षेत्र के सोशल वर्कर्स, RWA और स्थानीय गंभीर पत्रकारों के साथ मिलकर काम करना चाहिए।
- शिकायतों का निपटारा: जो लोग थानों से निराश होकर लौटते हैं, उनकी शिकायतों पर सीधे डीसीपी स्तर से ध्यान दिया जाना चाहिए।
नवनियुक्त डीसीपी को यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस ‘लिहाज और लालच’ के बजाय केवल ‘लॉ’ (कानून) के अनुसार काम करे। तभी जनता के बीच सुरक्षा का वास्तविक भाव पैदा होगा और पुलिस की छवि एक निष्पक्ष रक्षक के रूप में निखरेगी।


इस मीटिंग को सार्वजनिक तौर पर करना चाहिए था और एक हफ्ते पहले सांसद विधायक पार्षद और दिल्ली पुलिस को अपने पेज से जानकारी देनी चाहिए थी जिससे जनता अपनी बात खुलकर रख सके ऐसी मीटिंग का कोई फायदा नहीं