नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा की सुरक्षा दीवार लांघने वाले आरोपी सरबजीत सिंह को मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने तीस हजारी कोर्ट में पेश किया। अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिस की दलीलों को सुनने के बाद आरोपी को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस अब सरबजीत को पंजाब और उत्तर प्रदेश ले जाएगी ताकि उस पूरी साजिश और रूट का पता लगाया जा सके, जिससे वह हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में दाखिल हुआ था।
वकील का अजीब दावा: “विधानसभा को समझ बैठा गुरुद्वारा”
सुनवाई के दौरान सरबजीत के वकील ने कोर्ट में उसके मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का दावा किया। वकील ने दलील दी कि सरबजीत पिछले कुछ दिनों से बिना बताए चंडीगढ़ चला गया था और वहां गुरुद्वारे में रह रहा था। वकील के मुताबिक, जब उसे पता चला कि उसका भतीजा (भांजा) गायब है, तो वह दिल्ली आया और गलती से दिल्ली विधानसभा को ‘गुरुद्वारा’ समझकर उसके भीतर अपनी गाड़ी लेकर घुस गया। बचाव पक्ष ने शाहजहाँपुर के एक डॉक्टर का मेडिकल पर्चा भी पेश किया।
कोर्ट का तीखा सवाल: “मानसिक बीमार होकर पीलीभीत से दिल्ली तक कार कैसे चलाई?”
आरोपी के वकील की दलीलों पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने सवाल पूछा कि अगर सरबजीत पूरी तरह मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो उसने पीलीभीत से चंडीगढ़ और फिर दिल्ली तक सुरक्षित तरीके से कार कैसे चलाई? कोर्ट ने इस तर्क को संदिग्ध मानते हुए पुलिस को गहराई से जांच करने की अनुमति दी। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि सरबजीत ने अपना मोबाइल फोन कहीं फेंक दिया है, जिसकी बरामदगी देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है।
साजिश या सनक? 8 दिन में खुलेगा राज
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से 10 दिन की रिमांड मांगी थी, जिसमें से 8 दिन की कस्टडी मिली है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास से बरामद वाहन (टाटा सियारा) के मूल दस्तावेजों और उसके संभावित कनेक्शनों की जांच के लिए उसे उत्तर प्रदेश और पंजाब ले जाना जरूरी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस घटना के पीछे किसी अन्य व्यक्ति या संगठन की भूमिका है, या यह वाकई केवल एक ‘मानसिक विक्षिप्त’ व्यक्ति की करतूत है।
यह भी पढ़ें:– https://delhidarpantv.com/newly-appointed-dcp-peoples-representative/

