नई दिल्ली/कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण में अब दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘आप’ नेता अरविंद केजरीवाल की एंट्री हो गई है। केजरीवाल ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सोशल मीडिया पर दिए गए ‘दो टूक’ जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आयोग की भाषा को लेकर सवाल उठाते हुए इसे एक संवैधानिक संस्थान की गरिमा के खिलाफ बताया है।
केजरीवाल का पलटवार: “BJP से निर्देश ले रहा है आयोग”
अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग के एक्स (X) पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए लिखा— “अब ये कहने की भी ज़रूरत नहीं कि चुनाव आयोग सीधे बीजेपी से निर्देश लेकर और बीजेपी के अंडर में काम कर रहा है। ये अब जग ज़ाहिर है और बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।” केजरीवाल ने आयोग को नसीहत देते हुए आगे लिखा कि कम से कम ऐसी भाषा के ट्वीट करके इतने अहम संस्थान की इज़्ज़त तो सरेआम मत उछालिये।
आयोग का वो पोस्ट जिस पर मचा बवाल
दरअसल, चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक हैंडल से ममता बनर्जी की पार्टी TMC को संबोधित करते हुए लिखा था— “चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक। पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव भयरहित, हिंसारहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ और सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे।” आयोग का यह कड़ा रुख उस समय आया है जब TMC लगातार सुरक्षा बलों की तैनाती और केंद्रीय एजेंसियों के छापों पर सवाल उठा रही है।
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: सुरक्षा के ‘अभूतपूर्व’ इंतज़ाम
बंगाल की 294 सीटों पर इस बार चुनाव दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में हो रहे हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक है:
- 2,400 अर्धसैनिक कंपनियां: राज्य में लगभग 2,40,000 जवान तैनात किए गए हैं।
- महिला सुरक्षा बल: पहली बार 20,000 महिला अर्धसैनिक जवानों (करीब 200 कंपनियां) की रिकॉर्ड तैनाती की गई है।
- वोटर लिस्ट विवाद: TMC का आरोप है कि ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (SIR) के नाम पर लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिसे आयोग ने खारिज किया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि पोलिंग एजेंटों के बैठने के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होंगे। हालांकि, केजरीवाल के इस बयान ने बंगाल चुनाव की लड़ाई को ‘आयोग बनाम विपक्ष’ की दिशा में मोड़ दिया है।

